सर्किल रेट को लेकर बेशक लोग आपत्तियां कर रहे हों, प्रशासन ने भी सर्किल रेट काफी अधिक मानते हुए अधिक फेरबदल नहीं किया। लेकिन जमीन की खरीद में मंदी का असर नजर आने लगा है। जमीनों की खरीद-फरोख्त का कारोबार इस बार तो जमीन पर ही आ गया है। पिछले जून के मुकाबले इस जून में 1033 बैनामे कम हुए हैं। जबकि जून तक 2236 रजिस्ट्री में कमी आई है।
जिले में प्रमुख स्थानों पर जमीनों के रेट बेशक काफी अधिक हैं, लेकिन उनके लिए खरीददार नहीं मिल रहा है। तीन साल में रियल स्टेट में लगातार मंदी छाई हुई है। बैंकों से कर्ज लेकर कॉलोनियां एवं व्यवसायिक प्रोजेक्ट तैयार करने वाले बड़े-बड़े बिल्डर्स भी धड़ाम हो चुके हैं।
सिर्फ आवासीय क्षेत्रों में ही नहीं, खेतों की भूमि की भी खरीद-फरोख्त नहीं हो पा रही है।
जिससे रजिस्ट्री का कार्य भी ठंडा पड़ गया है। ऐसा नहीं है कि लोग जमीन खरीदने अथवा बेचने का प्रयास नहीं कर रहे। लगातार कॉलोनियां काटी जा रहीं हैं, लेकिन खरीदारों का टोटा नजर आ रहा है। इसका असर राजस्व पर भी पड़ा है। जून 2015 में 3761 रजिस्ट्री हुई थी, लेकिन जून 2016 में सिर्फ 2748 रजिस्ट्री ही हुई। 1033 रजिस्ट्री कम हुई हैं।
जून 2014 से 2016 तक की स्थिति ः उप महानिबंधक स्टांप कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार जून 2014 में 3946 बैनामे हुए थे, जून 2015 में 3781 बैनामे हुए, लेकिन जून 2016 में सिर्फ 2748 लोगों ने ही बैनामा कराया। वह भी छोटे-छोटे प्लाटों का।
अप्रैल से जून तक की स्थिति
2014 में अप्रैल से जून तक 11373 रजिस्ट्री हुई
2015 में अप्रैल से जून तक 11100 रजिस्ट्री हुई
2016 में अप्रैल से जून तक 8864 रजिस्ट्री हुई
आय कर विभाग के बढ़ते दायरे से न घबराएं
उप महानिबंधक स्टांप आरपी सिंह का कहना है कि रजिस्ट्री लगातार घटती जा रही हैं। अभी तक हुईं अधिकांश रजिस्ट्री भी छोटे-छोटे प्लाटों की ही हैं। लोग आय कर विभाग के बढ़ते दायरे से घबरा रहे हैं जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है।