चिलकाना मेें चेहल्लूम के जुलूस में मातम करते सोगवार। श्रोत सोगवार
चिलकाना। चेहल्लुम पर शिया समाज द्वारा एक मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस में हुसैन अलैहिस्सलाम को याद किया। शुक्रवार को कस्बे के मोहल्ला मजहर हसन में मरहूम हुसैन इमाम उर्फ नायाब की हवेली पर सदर अली इमाम उर्फ प्रिन्स की सरपरस्ती में आयोजित मजलिस को खिताब हुआ। इसमें मौलाना शोजब जलालपुरी ने बताया कि हुसैन अलैहिस्सलाम ने कुर्बानी पेश कर दीने मोहम्मद बचाया। उन्होंने हर इंसान को बताया की जुल्म से कभी डरना नहीं चाहिए, बल्कि जुल्म का डटकर मुकाबला करना चाहिए। उन्होंने इंसानियत को बचाने के लिए तीन दिन की भूख प्यास में अपना, अपने 71 साथियों सहित कर्बला के मैदान में सर कटा दिया। जो चेहल्लुम तक कर्बला की जलती हुई जमीन पर बेगोरो कफन लाशे पड़े रहे। इनको 20 चेहल्लुम के रोज दफनाया गया। मजलिस के बाद अंजुमने हैदरी ने जुलूस निकाला। इसमें अलम ताजिया एवं ज़ुल्जना बरामद कर सभी लोग सीनाजनी करते हुए शीश महल से होकर बड़े इमाम बाड़े में पहुंचे। नोहा खानी, जैनुल आबेदीन, आजम, फैज बिलाल, शिबू, अयान, समर अब्बास, कमर अब्बास ने पढ़ा।