इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश राजेश दयाल खरे ने देवबंद पहुंचकर उलमा से मुलाकात करने के साथ ही दारुल उलूम का भ्रमण भी किया। इस दौरान उन्होंने दारुल उलूम को भारतवर्ष की गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल बताया।
मंगलवार की दोपहर देवबंद पहुंचे न्यायाधीश राजेश दयाल खरे ने दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी और जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान मोहतमिम मौलाना बनारसी ने न्यायाधीश को दारुल उलूम के इतिहास, इल्मी व तहजीबी रिवायतों, बुजुर्गों की सेवाओं, कुर्बानियों, यहां दी जानी वाली शिक्षा और पढ़ने वाले छात्रों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
इस दौरान राजेश दयाल खरे ने कहा कि जो कुछ उन्होंने दारुल उलूम के बारे में पढ़ा और सुना था यहां आकर पता लगा कि यह उससे कहीं ज्यादा है। दारुल उलूम के उलेमा की देश की आजादी के लिए दी गई कुर्बानियों को कभी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि दारुल उलूम भारत की आजादी का एक अहम हिस्सा है।
उन्होंने संस्था में स्थित लाइब्रेरी का दौरा किया और हजारों वर्ष पुरानी ऐतिहासिक पुस्तकों को देखकर हैरानी जताते हुए कहा कि दारुल उलूम वाकई में भारतवर्ष की गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल है। इसके उपरांत न्यायाधीश एशिया की प्रसिद्ध मसजिद रशीदिया को भी देखने गए।
इस मौके पर जिला न्यायधीश उमेश चंद्रा त्रिपाठी, मुफ्ती मोहम्मदुल्लाह कासमी, तहसीन खां, मौलाना शाहआलम, मौलाना मुर्तजा, मौलाना मुकीम कासमी, असजद, राशिद हुसैन, बृज कौशिक और चौधरी नरेश आदि मौजूद रहे।