शेखपुरा डेरा बन्दा नवाज पर आयोजित उर्स में उमड़ी भीड़।
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हजरत कुतबे आलम शेख अब्दुल कुद्दूस के 492 वें उर्स का मुख्य कार्यक्रम जुलूस जुब्बा शरीफ पूरी अकीदत और अहतराम के साथ निकाला गया। दूर दराज से आए हजारों जायरीनों ने जुब्बा मुबारक की जियारत कर मन्नतें मांगी।
शनिवार की सुबह दस बजे मोहल्ला मखदूम जहां स्थित आस्तान-ए-कुद्दूसिया से जुलूस आरंभ हुआ। कलियर शरीफ के सज्जादानशीं शाह मंसूर एजाज मुख्य सवारी पर विराजमान हुए ।
उन्होंने हजरत कुतबे आलम की गुदड़ी, दस्तार और तस्बीह मुबारक को जेबतन किया। बताया जाता है कि इस गुदड़ी को हजरत कुतबे आलम ने 40 वर्षों तक अपने शरीर पर धारण कर रब की इबादत की थी। मान्यता है कि इस पर पहली नजर पड़ते ही जो दुआ की जाए वह मुराद अवश्य पूरी होती है।
जुलूस की अगुवाई दरगाह हजरत कुतबे आलम के सज्जादानशीं शाह महताब आलम कुद्दूसी और उनके अनुज शादाब उर्फ पप्पू मियां ने की। अल्लाहु-अल्लाहु की बुलंद आवाजों के साथ जुलूस देश और विदेशों से आए जायरीनों, सूफी और दरवेशों के सैलाब के साथ मोहल्ला सैयदान तक पहुंचा।
जहां हजरत कुतबे आलम के मजार पर शाह मंसूर एजाज ने देश और दुनिया में अमनो-अमान और खुशहाली की दुआ कराई। जुलूस में रदौली के सज्जादानशीं नैय्यर मियां, कैराना के सज्जादानशीं सूफी निसार, अंबेहटा के शाह मशरूर, सलीम फरीदी, कलीम फरीदी, अजहर मियां, सभासद सुहेल खान, ख्वाजा सुहेल, अथहर फरीदी, डा. प्रवीन आलम मौजूद रहे।