देश का प्रसिद्ध श्री जाहरवीर गोगा की म्हाड़ी पर लगने वाला तीन दिवसीय मेला 26 छड़ियाें के पहुंचने पर शुरू होता है। इस मेले का इतिहास 800 साल से भी ज्यादा पुराना है। राजस्थान के बागड़ के बाद यहीं सबसे बड़ा मेला लगता है। बाबा श्री जाहरवीर ने कबली भगत को नेजा दिया था, तभी से मेला भरता आ रहा है, जिसमें लाखों श्रद्धालु प्रसाद और निशान चढ़ाने पहुंचते हैं।
हर वर्ष शुक्ल पक्ष की दशमी पर महानगर से तीन किलोमीटर दूर गंगोह रोड स्थित श्री जाहरवीर गोगा महाराज की म्हाड़ी पर तीन दिवसीय मेला लगता है। इस बार मेला शुक्ल पक्ष की दशमी पर 24 सितंबर से भरेगा। विभिन्न इलाकों से ढोल और बैंडबाजों के साथ सभी 26 छड़ियां नेजे की अगुवाई में मेला गुघाल परिसर स्थित श्री विश्रामपुरी काल भैरव मंदिर पहुंचती हैं और यहां से पूजन के बाद गोगा म्हाड़ी की ओर प्रस्थान करती हैं। तीसरे दिन छड़ियां इसी रास्ते से वापिस लौट जाती हैं। इन तीन दिनों में वेस्ट यूपी, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड़, राजस्थान और दिल्ली से तीन लाख से अधिक श्रद्घालु निशान और प्रसाद चढ़ाने भी पहुंचते हैं।