सहारनपुर। कोरोना काल में जिन सरकारी अस्पतालों को पीएम केयर फंड से वेंटिलेटर मिले थे, उनकी शासन ने रिपोर्ट मांग ली है। इसे लेकर शासन की तरफ से सभी अस्पतालों को पत्र जारी किया गया। जिसमें मांगा गया है कि कितने वेंटिलेटर हैं, कितने संचालित है और कितने बंद पड़े हैं।
दरअसल, कोरोना काल में मरीजों की जान बचाने के लिए पीएम केयर फंड से अस्पतालों में वेंटिलेटर मंगाए गए थे। राजकीय मेडिकल कॉलेज को 44, जिला महिला अस्पताल को आठ, फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को पांच और एसबीडी जिला अस्पताल को दो वेंटिलेटर मिले थे। कोरोना काल में फतेहपुर सीएचसी को लेवल-टू अस्पताल बनाया गया था, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना पॉजिटिव को बेहतर उपचार मिल सके, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में एकाएक मौत का आंकड़ा बढ़ा था। राजकीय मेडिकल कॉलेज और एसबीडी जिला अस्पताल में पीएम केयर फंड से मिले वेंटिलेटरों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि जिला महिला अस्पताल में वेंटिलेटरों को एक कमरे में बंद किया है। इनका इस्तेमाल सिर्फ मॉकडि्रल के लिए किया गया। इसके अलावा मरीजों को वेंटिलेटरों का कोई लाभ नहीं पहुंचा। यहीं हाल ही फतेहपुर सीएचसी का है। वह भी ऐसे ही कमरे में रखे हुए हैं। अब शासन ने वेंटिलेटरों की रिपोर्ट मांगी तो अस्पतालों में खलबली मच गई। शासन ने पूछा कि कितने वेंटिलेटर चालू स्थिति में है।
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अमर उजाला उठा रहा है मुद्दा
वेंटिलेटरों को लेकर अमर उजाला पिछले कुछ दिनों से लगातार मुद्दा उठा रहा है। इसमें सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में वेंटिलेटरों का सच जाना गया। कहां पर वेंटिलेटरों का मरीजों को लाभ मिल रहा है और कहां ताले में बंद है। अब शासन की तरफ से रिपोर्ट मांगने के बाद उम्मीद जगी है कि तालों में बंद वेंटिलेटर शायद मरीजों के काम आ सकेंगे।
जिला महिला अस्पताल में पीएम केयर फंड से आठ वेंटिलेटर मिले थे। जिनका अस्पताल नहीं हो रहा है। शासन की तरफ से वेंटिलेटरों को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है।
- डॉ. इंद्रा सिंह, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल