सहारनपुर। शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग से पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान मरने वाले शिक्षकों की जानकारी मांगी है। जनपद में चुनाव ड्यूटी के दौरान तो किसी शिक्षक का निधन नहीं हुआ, मगर यह सच है कि चुनाव के बाद बड़ी संख्या में शिक्षकों की तबीयत बिगड़ी, जिनमें से कई शिक्षकों की जान भी जा चुकी है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद शिक्षकों की तबीयत बिगड़ने और मौतों की घटनाएं प्रदेश भर में हुईं। शिक्षक नेताओं की मानें तो दो दर्जन से अधिक शिक्षकों की मौत सहारनपुर में भी हुई है। अब शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग ने मरने वाले शिक्षकों की जानकारी मांगी है। मगर शासन ने केवल चुनावी ड्यूटी के दौरान हुई मौतों के बारे में पूछा है। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजकुमार चौधरी का कहना है कि सरकार केवल चुनावी ड्यूटी के दौरान मौत का आंकड़ा क्यों मांग रही है। चुनाव के दौरान संक्रमित होने के बाद जिले के 25 से अधिक शिक्षकों की मौत हुई है उनके बारे में क्यों नहीं पूछा जा रहा है। उन्होंने शासन में बैठे लोगों की नीयत पर सवाल उठाए हैं। उनकी मांग है कि चुनावी ड्यूटी के बाद अचानक संक्रमित हुए जिन शिक्षकों की जान गई है सरकार उनके आश्रितों के बारे में सोचे।
उधर, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रमेंद्र कुमार भी मानते हैं कि चुनाव ड्यूटी के बाद कई शिक्षकों की मौत हुई है। उनका कहना है कि शासन ने केवल चुनाव ड्यूटी के दौरान मौतों के बारे में पूछा है। जबकि सहारनपुर में चुनाव ड्यूटी के दौरान किसी शिक्षक की मौत नहीं हुई है।