सहारनपुर। समय में बदलाव के साथ लोगों की पसंद भी बदल रही है। शादी-विवाह, मुहूर्त आदि मांगलिक कार्यों के लिए लोग अब प्राकृतिक फूलों के साथ कृत्रिम सजावटी फूलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में सजावटी फूलों के कारोबार को तरक्की की खुशबू मिल रही है।
पहले जहां गुलदस्ते, माला आदि में केवल ताजे फूलों का इस्तेमाल किया जाता था, वहीं अब इनकी जगह सजावटी फूल लेते जा रहे हैं। सजावटी फूल प्राकृतिक फूलों से सस्ते पड़ते हैं। यह फूल लंबे समय तक ताजे जैसे भी दिखाई देते हैं। इन्हें बार-बार बदलने की भी जरूरत नहीं पड़ती है। ऐसे में प्राकृतिक फूलों के कारोबारियों को कुछ हद तक परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है। प्राकृतिक फूलों को मंगाने के बाद उनके मुरझाने का डर रहता है। फूलों को ठंडे पानी आदि में रखना पड़ता है। इससे लागत भी बढ़ती है। प्राकृतिक फूलों की ही तरह जबीरा, कारनेशन, ऑर्किड़, लिली आदि के सजावटी फूल भी आ गए हैं।
- बोले दुकानदार
महानगर के घंटाघर चौक पर ऑर्टिफिशियल फूलों के दुकानदार सतीश बताते हैं कि कृत्रिम फूल काफी समय तक संभालकर रखे जा सकते हैं। वह दिल्ली आदि से जगहों से कृत्रिम फूल मंगाते हैं। कृत्रिम फूलों की झालर में गुलाब, सूरजमुखी, गेंदा, मोगरा आदि शामिल है। इसके अलावा बनावटी पेड़, बंदनवार भी मौजूद है।
- कोर्ट रोड स्थित प्राकृतिक फूलों के दुकानदार आलोक वत्स बताते हैं कि प्राकृतिक फूलों के प्रति लोगों का रवैया बदल रहा है। खासकर शादी, बर्थडे आदि की सजावट के लिए कृत्रिम फूल अधिक इस्तेमाल होने लगे हैं। इससे बिक्री पर असर पड़ा है।