सहारनपुर। तब दीपा महज 11 साल की थी। माता-पिता से बिछड़ चुकी थी। पता नहीं था कहां जाएगी, क्या होगा भविष्य। बेसहारा दीपा ट्रेनों में भटक रही थी। इस दौरान उसे एक सज्जन मिले, जिन्होंने उसे बाल कल्याण समिति मुजफ्फरनगर के सुपुर्द कर दिया। कोर्ट ने उसे बाल गृह (बालिका) सहारनपुर भेजा तो, वहां से दीपा की किस्मत ने पलटी मारी। पढ़ाई की ललक थी तो मददगार भी मिल गए। दीपा ने साहस दिखाया और बौद्धिक क्षमता के दम पर आज वह उस मुकाम पर पहुंच गई, जहां तक पहुंचने में संपन्न परिवारों के बच्चे भी लड़खड़ा जाते हैं।
यह कहानी है उस लड़की की है जो सहारनपुर में जनता रोड पर पुष्पांजलि विहार स्थित बाल गृह (बालिका) में रहती है और सीबीएसई 12वीं में 76.4 प्रतिशत अंकों के साथ पास हुई है। मूलरूप से पश्चिम बंगाल के किन्नू बासपारा की रहने वाली दीपा के पिता शंकरदास कचरा बीनने का कार्य करते हैं। 30 मई 2014 को मुजफ्फरनगर बाल कल्याण समिति ने कोर्ट के आदेश पर दीपा को बाल गृह में भेजा गया था। यहां रहते हुए उसने प्रारंभिक शिक्षा के साथ अब 12 वीं उत्तीर्ण की है। दीपा भविष्य में शिक्षिका बनना चाहती है।
-- राजकीय आश्रम पद्धति बालिका विद्यालय में ली शिक्षा
दीपा ने 10 वीं और 12 वीं की पढ़ाई राजकीय आश्रम पद्धति बालिका विद्यालय में ली। इस विद्यालय में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों की बेटियां पढ़ाती हैं। विद्यालय की शिक्षिका निधि राणा ने बताया कि विद्यालय में 23 छात्राएं 12वीं में पंजीकृत थीं। सभी उत्तीर्ण हुई हैं। उनमें सामिया ने तो 92.2 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। दीपा की कामयाबी पर पूरे विद्यालय को हर्ष है।
पूर्व प्रधानाचार्या से मिला मां का प्यार
राजकीय आश्रम पद्धति बालिका विद्यालय की शिक्षिका निधि राणा ने बताया कि दीपा की मेहनत को सभी लोग सराहते हैं, लेकिन पूर्व प्रधानाचार्या डाक्टर शोभारानी शर्मा ने विशेष रूप से दीपा का ख्याल रखा। उसके लिए किताब, कपड़े आदि का खर्चा तक दिया। डाक्टर शोभारानी शर्मा अब बिजनौर जा चुकी हैं।
हाईस्कूल में मिला था 51 हजार का पुरस्कार
बाल गृह (बालिका) के हाउस फादर रवि कुमार ने बताया कि बाल गृह के प्रबंध निदेशक वीपी सिंह सहित सभी लोगों ने दीपा को शुभकामना दी है। दीपा ने दो साल पूर्व हाईस्कूल में भी 76.7 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। तब कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने दीपा को 51 हजार रुपये का पुरस्कार दिया था। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री सूर्यप्रताप शाही, महापौर संजीव वालिया, पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा और तत्कालीन जिलाधिकारी भी दीपा को सम्मानित कर चुके हैं।
तलाश के बावजूद नहीं मिले परिजन
बाल गृह के हाउस फादर रवि कुमार ने बताया कि दीपा द्वारा बताए गए पते के अनुसार पश्चिम बंगाल में उसके माता पिता को तलाश किया गया, लेकिन वह नहीं मिल सके।
दीपा को मिले अंक
अंग्रेजी में 66, हिन्दी में 76, इतिहास में 78, समाजशास्त्र में 77, अर्थशास्त्र में 67, वैकल्पिक विषय फिजिकल एजुकेशन में 85 अंक मिले हैं।
सहारनपुर के बाल गृह में रहने वाली छात्रा दीपा- फोटो : SAHARANPUR