सहारनपुर। केंद्र सरकार ने हाल ही में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास किया है लेकिन गांव देहात में अभी भी अधिकांश महिला प्रधानों के पति या पुत्र ही गांव की सत्ता चलाते हैं। जिले की 884 ग्राम पंचायतों में से 298 पंचायतों में महिला ग्राम प्रधान हैं लेकिन बड़ी संख्या में उनके प्रतिनिधि ही ब्लाक से लेकर जिला मुख्यालय पर होने वाली बैठकों में प्रतिभाग करते हैं। मगर इनमें कुछ ऐसी भी ग्राम प्रधान हैं जो खुद पंचायत के मुखिया की जिम्मेदारी संभालती हैं और विकास कार्य कराने को लेकर गंभीर भी हैं। अमर उजाला टीम ने ऐसी ही कुछ महिला प्रधानों से बात की। इनका कहना है कि वे अपनी ग्राम पंचायतों को आदर्श पंचायत बनाने की मुहीम के साथ विकास कार्य करा रही हैं।
अच्छा लगता है पंचायत की जिम्मेदारी उठाकर
विकास खंड मुजफ्फराबाद की ग्राम पंचायत तकीपुर की ग्राम प्रधान अनिता रानी ग्राम पंचायत की बैठकें लेने के साथ ही ब्लाक और जिला स्तर पर होने वाली बैठकों में खुद प्रतिभाग करती हैं। उनका कहना है कि जनता ने उन्हें किसी विश्वास के साथ ही चुना है। पति अपने कार्यों में व्यस्त रहते हैं तो फिर ऐसी स्थिति में खुद ही पंचायत के सारे दायित्वों का निर्वहन करती हैं। गृहस्थी के साथ पंचायत की जिम्मेदारी उठाना उन्हें अच्छा लगता है। वे कहती हैं कि अपनी पंचायत को आदर्श पंचायत बनाना उनका सपना है जिसे पूरा करने के लिए वे चरणबद्ध तरीके से विकास करा रही हैं।
अपनी मौजूदगी में कराती हैं विकास कार्यों का संपादन
नानौता ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम कचराई की ग्राम प्रधान अंजू देवी ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले सभी विकास कार्यों सहित अन्य कार्यक्रम स्वयं की देखरेख में करती है। अंजू देवी गांव में होने वाले सभी विकास कार्यों को अपनी मौजूदगी में संपन्न कराती हैं। उनका कहना है कि अब महिलाओं के दोयम दर्जे वाली अवधारणा धीरे धीरे खत्म हो रही है। उनका कहना है कि वे गांव में बालिकाओं की शिक्षा के लिए कन्या इंटर कालेज की स्थापना को प्रयासरत हैं। गांव में आंगनबाड़ी केंद्र की भी डिमांड की गई है। ताकि गांव की बेटियां पढ़ लिख कर उच्च पदों को सुशोभित कर सकें।
थाने तक करती हैं पीड़ित की पैरवी
बलियाखेड़ी ब्लॉक के बेरीतगा गांव की प्रधान पूनम शर्मा इन सबसे आगे बढ़ कर गांव में होने वाले छोटे मोटे झगड़ों का समझौता कराने को मध्यस्थता भी करती हैं। पीड़ित पक्ष के साथ थाने जाकर उसकी मदद भी कराती हैं। उनका कहना है कि महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में कम नहीं है। उनके उनके परिवार की तरफ से भी पंचायत में विकास कार्य और प्रधानी के कार्य खुद करने की आजादी मिली हुई है।
अनिता रानी प्रधान तकीपुर
अनिता रानी प्रधान तकीपुर