प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साल पहले गांधी जयंती पर स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी और तब नेता से लेकर अफसर तक झाड़ू लेकर खड़े हो गए थे। धीरे-धीरे यह अभियान थमता नजर आने लगा है। हालांकि कई क्षेत्रों में बदलाव भी हुए हैं और लोग सफाई के प्रति जागरूक भी हुए।
शहर में स्वच्छ भारत अभियान की कामयाबी उम्मीद से कम मानी जा सकती है। आलम यह है कि सफाईकर्मियों के इलाकों में गंदगी के ढेर लगे हैं। सरकारी शौचालय पर्याप्त सफाई नहीं होने की वजह से बंद पड़े हैं।
जिला प्रशासन ने सामाजिक संगठनों को साथ लेकर मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया था। कुछ दिन सफाई होने केे बाद फिर से वही स्थिति बन गई। शहर के प्रमुख स्थलों का हाल जानने की कोशिश की तो शहर की शान को दाग लगा रहे गंदगी के शर्मनाक नजारे सामने आए। इनमें सबसे ज्यादा समस्या मलीन बस्तियों में है। चौंकाने वाली स्थिति यह है कि नगर निगम के साथ ही नागरिकों की अनदेखी और लापरवाही भी इस हालात के लिए जिम्मेदार है। शहर में गंदगी के कारण ही रोजाना अस्पतालों में हजारों मरीज मलेरिया, डेंगू, डायरिया, टाइफाइड जैसे रोगों से जूझ रहे हैं।
खुले में शौच को मजबूर कई बस्तियां
शहर को साफ रखने वालों की खुद की बस्तियों की हालत बद से बदतर है। वहां निगम की ओर से सफाईकर्मियों की व्यवस्था न करने के साथ ही निगम की ओर से बनवाए गए शौचालय भी बंद ही पड़े हैं। जिला जेल के सामने बसी मलिन बस्ती मौज्जमपुरा में सफाई कर्मचारी कई महीनों से गया ही नहीं। नगर निगम की ओर से बनवाए गए शौचालय का इस्तेमाल भी लोग 20 रुपये महीना नहीं करने की वजह से शौचालय पर ताला लटका दिया गया। ऐसे में बस्ती के लोग ढमोला किनारे खुले में शौच करने को मजबूर हैं।
बिशंभर, जैकी, हुकम सिंह, प्रवीण ने बताया कि खुले में शौचालय करने में बहू और बेटियों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। उधर, पुराना कमेला स्थित पटेल नगर में भी वाल्मीकि बस्ती की हालत बदतर है। यहां नालियां चौक होने की वजह से पानी रुका हुआ है, जिसकी वजह से मलेरिया जैसी बीमारियां फैल रही हैं। यहां भी नगर निगम का शौचालय पिछले 15 साल से बंद है, जिसकी वजह से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। राकेश, विशाल और सन्नी आदि ने शौचालय चालू कराने की मांग की है। हकीकत यह है कि शहर की अन्य मलिन बस्तियों के हालत भी इससे जुदा नहीं हैं। सफाई स्मार्ट सिटी की पहली जरूरत है।
केन्द्र की महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी योजना में शामिल सहारनपुर के सामने पहली 20 की सूची में शामिल होने की चुनौती है। स्मार्ट सिटी की पहली जरूरत ही सफाई है। ऐसे में लोगों को और जागरूक होने की जरूरत है। समाजसेवी डा. एससी बंसल कहते हैं कि सफाई को लेकर आम जनता में थोड़ी जागरूकता आई है। मगर, यह समझना होगा कि शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी हम सबकी है। सफाई को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
कूड़े के री-साइकिल की है योजना
सफाई को लेकर बृहद स्तर पर कार्य किया जा रहा है। हम एक निजी कंपनी से बात कर रहे हैं और उसकी मदद से पूरे शहर को साफ करने की योजना है। इसमें रोजाना निकलने वाले कूड़े को री-साइकिल कर उसका उपयोग किया जाएगा। नगर निगम के साथ लोग भी स्वच्छता अभियान का हिस्सा बनें। शहर की साफ रखने में भागीदार बनें।
- डा. नीरज शुक्ला, नगरायुक्त