सहारनपुर में स्मार्ट सिटी योजना को लेकर सहारनपुर में पिछले तीन साल से तैयार किए जा रहे प्रस्तावों में सहारनपुर की जनता को बड़े-बड़े सपने दिखाए जाते रहे हैं। अब चूंकि सहारनपुर का चयन योजना में हो गया है।
तो जनता को इन बदलावों के नजर आने की उम्मीद है। मगर आज तक की प्रशासन खासकर नगर निगम की कार्यप्रणाली जनता के बीच भरोसा कायम नहीं कर सकी है। आज तक अतिक्रमण हटाओ अभियानों की विफलता इसका बेहतर उदाहरण है।
कमजोर इच्छा शक्ति के कारण शहर की तमाम छोटी और बड़ी सड़कें अतिक्रमण की जद में हैं, जिनकी वजह से दिनभर जाम रहता है। ऐसे में बाकी के प्रस्तावित विकास कार्य करा पाना बड़ी चुनौती बनने वाला है।
यातायात व्यवस्था के लिए उठाने होंगे कदम
शहर की यातायात व्यवस्था बेहद लचर है। अनगिनत टेंपो, ई-रिक्शा और अन्य सवारी वाहन व साइकिल रिक्शाओं की भरमार है। चूंकि शहर में भारी संख्या में बिना पंजीकृत ई रिक्शा और टेंपो दौड़ रहे हैं। ऐसे में आरटीओ के पास भी इनका सही आंकड़ा नहीं है। आलम यह है कि लोगों की सुविधा के लिए बने यातायात के यह साधन यातायात में बाधक साबित हो रहे हैं। योजना के तहत टेंपो और ई रिक्शाओं के रूट तय करने होंगे, जिससे संकरी बाजारों में इनकी एंट्री जाम की वजह न बने। साथ ही लंबे समय से सिटी बस चलाने की चर्चाएं होती रही हैं। कुछ खास मार्गों पर सिटी बसों का संचालन लोगों को राहत पहुंचा सकता है। इतना ही नहीं, शहर में अनेक जगहों पर अंडरपास और अपर पाथ भी बनाने होंगे, जिससे पैदल चलने वालों को सुविधा रहे।
बस अड्डों को शहर से बाहर करना
परिवहन निगम के दोनों बस अड्डे शहर के बीच से संचालित हो रहे हैं। ऐसे में तमाम रूटों की बसें अड्डों तक पहुंचने के लिए शहर के बीच से गुजरती हैं, जिनकी वजह से जाम रहता है। बस अड्डों को शहर से बाहर ले जाने की कवायद पिछले करीब पांच साल से चल रही है, मगर आज तक जगह फाइनल नहीं हो सकी है। हालाकि प्रशासन और परिवहन निगम दिल्ली रोड पर जगह चयनित कर लिए जाने के दावे करता रहा है, मगर बस अड्डे लगातार मुसीबत बने हुए हैं। अनेक जगहों पर अनाधिकृत रूप से प्राइवेट बसों के भी अड्डे चल रहे हैं, जिनको भी शहर से बाहर किया जाना बेहद जरूरी है। इनके अलावा अनेक जगहों से टेंपो और ई रिक्शाओं का संचालन भी अनाधिकृत रूप से हो रहा है, जिनको व्यवस्थित किए जाने की जरूरत है।
अतिक्रमण शहर की सबसे बड़ी समस्या
शहर की तमाम छोटी और बड़ी सड़कें अतिक्रमण की जद में हैं। कहना गलत न होगा कि अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रशासन आज तक मन से इच्छा शक्ति का प्रयोग नहीं कर सका है। आलम यह है कि टीम आगे अतिक्रमण हटाती चलती है और पीछे दुकानें फिर से सड़क पर सजती जाती हैं। तमाम बाजारों में ज्यादातर दुकानें सड़कों पर हैं। अनेक बड़े मार्गों पर अस्थाई के साथ ही स्थाई अतिक्रमण भी है। मगर हमेशा ही प्रशासन कभी व्यापारी संगठनों के दबाव तो कभी राजनीतिक दबाव में अतिक्रमण को हटा नहीं पाता है। इसके लिए उन्हें व्यापारियों को भी तैयार करना होगा।
पार्किंग की व्यवस्थाएं करनी होंगी
शहर में पर्याप्त पार्किंग न होने की वजह से भी अतिक्रमण और जाम रहता है। ज्यादातर व्यापारी अपने वाहनों को सड़कों पर लगाते हैं, जिसके बाद सड़कों की चौड़ाई अपने आप आधी रह जाती है। जिला अस्पताल रोड पर अनेक कारें सड़क के बीच में डिवाइडर के साथ खड़ी होती हैं। नेहरू मार्केट में तमाम व्यापारी अपनी बाइक दुकानों के सामने लगाते हैं। यही स्थिति अन्य बाजारों की भी है। ऐसे में योजना के तहत लोगों को पार्किंग बनाकर देनी होंगी, जिससे तमाम वाहन एक निर्धारित स्थान पर सुरक्षित खड़े हो सकें।
मिनी रिंग रोड भी बड़ी जरूरत
स्मार्ट सिटी योजना के तहत पहले चरण से शहर के चारों और मिनी रिंग रोड बनाने की बात कही जा रही है। वास्तव में यह शहर की जरूरत भी है। गौरतलब है कि तमाम बड़े वाहन शहर के बीच से होकर गुजरते हैं, जिनकी वजह से शहर में खासकर घंटाघर पर दिन भर जाम रहता है। यदि मिनी रिंग रोड बन जाए तो इससे शहर के बाहर के लोगों को दूसरे छोर जाने के लिए तो सुविधा होगी ही। साथ ही बड़े वाहन भी बाहरों बाहर निकल सकेंगे।
कचरा प्रबंधन की व्यवस्था करना होगा
कचरा शहरवासियों के लिए बड़ी समस्या है। डंपिंग ग्राउंड न होने की वजह से नगर निगम कचरे को शहर के बाहर डालता आ रहा है। इन दिनों बेहट रोड पर एक तालाब को पाटने का काम कचरे से किया जा रहा है। कचरा डालने की वजह से स्थानीय लोग परेशान हैं, जिनको बीमारियां फैलने का खतरा सता रहा है। ऐसे में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था करना जरूरी रहेगा। हालांकि प्रशासन डंपिंग ग्राउंड की तलाश में जुटा होने का दावा कर रहा है।