मंडी यार्ड में मुख्य मार्ग पर थलों के आवंटन को लेकर आढ़तियों में दो फाड़ हो गया है। दुकान पाने वाले आढ़तियों ने चेताया कि यदि थलों का आवंटन मुख्य मार्ग पर किया गया तो वे अपनी दुकानें बंद करके चाबियां मंडी सचिव को सौंप देंगे।
उधर, थलों की श्रेणी में आने वाले आढ़तियों का कहना है जिस जगह पर थले की जगह दी जा रही है, वहां मामूली बारिश के बाद तालाब बन जाएगा। मंडी प्रशासन ने थला आवंटन की प्रक्रिया को अंतिम रुप देना शुरू कर दिया है।
दो दिन पूर्व शुरू हुए रसूलपुर स्थित छुटमलपुर मंडी यार्ड में शनिवार की शाम उस वक्त आढ़तियों में दो गुट बन गए जब दुकानों से वंचित आढ़तियों ने मुख्य मार्ग पर फड़ लगाने के लिए निशानदेही करनी चाही।
इस पर दुकान पाने वाले आढ़तियों अंकित गोयल, प्रवीण बंसल, आढ़तियां एसोसिएशन के सचिव विमल चौहान, नीटू, सचिन, मोहन कांबोज, वाजिद अली, इमरान, संजीव गुप्ता आदि ने इसका विरोध करते हुए साफ कहा कि यदि मुख्य मार्ग पर थला आवंटित किया गया तो वे अपनी दुकानों को बंद करके चाबियां मंडी सचिव को सौंप देंगे।
कहना था कि उन्होंने दस से लेकर तीस लाख रुपये तक की बोली लगा कर दुकानें ली हैं। ऐसे में मात्र कुछ हजार रुपये देकर उनसे अच्छा स्थान थले के लिए आवंटित किया जाना उनके साथ सौतेला व्यवहार है, जिसे बरदाश्त नहीं किया जाएगा।
जबकि दुकानों से वंचित रहे शराफत अली, देवेंद्र राणा, सज्जाद अली, गुलजार अहमद, फुरकान, रकम सिंह, मिंटू, अजब सिंह, तिलकराम, मुंतजीर, रागिब अली और मोहसीन आदि का कहना था कि जिस जगह पर मंडी प्रशासन उन्हें थले आवंटित कर रहा है, वहां तीन से चार फीट की गहराई है। मामूली बारिश के बाद वहां पानी भर जाएगा। फिलहाल वहां फल और सब्जी से भरी गाड़ियां भी नीचे नहीं उतर सकती है। उन्हें नीलामी चबूतरे पर थलों का आवंटन किया जाए।
उधर मंडी सचिव का कहना है कि मुख्य मार्ग पर केवल एक दो दिन के लिए काम करने की बात हुई थी। विरोध होने पर उसे भी स्थगित कर दिया गया है। नीलामी चबूतरों पर थले नहीं दिए जा सकते हैं। अब जहां डीडी प्रशासन की तरफ से अनुमति मिली है वहीं पर थलों का आवंटन किया जा रहा है।