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‘जन गण का आधार है हिंदी, जन-जन तक पहुंचाना है’

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- हिंदी हैं हम -- ऑनलाइन काव्य गोष्ठी में शामिल साहित्यकार। - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। विश्व हिंदी दिवस पर अमर उजाला फाउंडेशन के अनूठे अभियान हिंदी हैं हम के तहत ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कवि एवं साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं सुनाकर हिंदी के प्रति प्रेम को उजागर किया। साथ ही देशवासियों से भी हिंदी के प्रति समर्पण भाव से कार्य करने और दूसरों को भी प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।
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रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान मुजफ्फरनगर से जुड़ी सुशीला शर्मा ने हिन्दी प्यारी गीत सुनाया - आओ निर्मल जोत जलाएं, निज भाषा की अलख जगाएं। डॉ. रागिनी भूषण ने सुनाया - छंदों की थाली में तेरी, मन के सुरभित फूल सजा, शब्द शिल्प के दीपों में स्नेहिल बाती को फिर उजला। प्रतिभा त्रिपाठी ने सुनाया - जन गण का आधार है हिंदी जन-जन तक पहुंचाना है, भारत के मस्तक पर हिंदी का शुभ तिलक लगाना है। डॉ. सुमेधा नीरज ने सुनाया - लक्ष्य मिला, भटकन समाप्त, जीवन सफल। डॉ विजेंद्रपाल शर्मा ने सुनाया - आओ बच्चे हो लें, इसी बहाने से कुछ पल सच्चे हो लें, सौ-सौ फागुन आए, सबके जीवन में मनभावन रंग लाए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे योगेन्द्रपाल दत्त ने सुनाया - आज विश्व में हो रही हिंदी की जयकार, आओ हम तुम भी करें इसका और प्रसार। इनके अलावा भी कई साहित्यकारों ने रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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