अंग्रेज हुकूमत के खिलाफ विद्रोह में अग्रणी रहे ठाकुर बख्शी सिंह
नकुड़ (सहारनपुर)। 1857 में मेरठ से शुरू हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी जल्दी ही सहारनपुर जिले में पहुंच गई थी। जिले के लोगों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया था और देश पर कुर्बान होने वाले वीरों ने पुलिस के दांत खट्टे कर दिए थे। ऐसे वीरों में नकुड़ क्षेत्र के ठाकुर बख्शी सिंह का नाम प्रमुख रहा, इनको आज भी क्षेत्रीय लोग याद करते हैं।
ठाकुर बख्शी सिंह नकुड़ क्षेत्र के गांव टाबर के रहने वाले थे। पूर्व पालिका चेयरमैन बालेश्वर शास्त्री ने बताया कि क्रांतिकारियों ने उस दौरान अंग्रेजी हुकूमत का विरोध कर नकुड़ तहसील और थाने पर धावा बोलकर तोड़फोड़ व आगजनी कर दी थी। इसमें ठाकुर बख्शी सिंह ने अग्रणी भूमिका निभाई थी। उन्होंने बताया कि उस समय अंग्रेज सिपाहियों ने ठाकुर बख्शी सिंह को उनके गांव टाबर से गिरफ्तार कर लिया था।
हाथी के पीछे बांधकर लाए गए थे बख्शी सिंह
नकुड़। गांव टाबर से अंग्रेज सिपाहियों ने जब ठाकुर बख्शी सिंह को गिरफ्तार किया तो हाथी के पीछे बांधकर नकुड़ तहसील निकट स्थित सराय चौक तक लाए थे। वहां हाथी से कुचलाकर निर्मम हत्या की थी। जनता में खौफ पैदा करने के लिए उनके शव को सराय के सामने कुएं के पास तीन दिन तक पेड़ पर लटकाए रखा था। ताकि कोई भी व्यक्ति हुकूमत के खिलाफ आवाज ना उठा सके।
दूध निकालते समय किए गए थे गिरफ्तार
नकुड़। ठाकुर बख्शी सिंह के पांचवीं पीढ़ी के वंशज श्याम सिंह राणा मूल निवासी गांव काजी बांस तथा हाल निवासी मोहल्ला चौधरीयान नकुड़ ने बताया कि ठाकुर बख्शी सिंह उनके दादा के दादा थे। बताया कि बचपन में उनकी बुआ हमेली देवी उन्हें ठाकुर बख्शी सिंह की बहादुरी के किस्से सुनाया करती थी। बुआ ने बताया था कि एक दिन शाम को ठाकुर बख्शी सिंह गांव स्थित अपने घेर में भैंसों का दूध निकाल रहे थे, तभी पुलिस ने पूरे गांव को घेर लिया और बख्शी सिंह को गिरफ्तार कर लिया था।
सराय चौक के पास है शहादत के निशां
नकुड़। तहसील निकट शिव मंदिर के सामने पंसारी की दुकान करने वाले शिवचरण शर्मा और सभासद सुभाष धनगर ने बताया कि जिस कुएं के पास पेड़ पर ठाकुर बख्शी सिंह का शव लटकाया गया था, उस कुएं के पास एक शिवलिंग था। जिस पर अब शिव मंदिर बना हुआ है। मंदिर के सामने ही सराय चौक हुआ करता था। बाद में इस जमीन के कुछ हिस्से पर एसडीएम आवास बन गया और कुछ हिस्से को विभिन्न लोगों के नाम आवंटित कर दिया गया था।
श्याम सिंह राणा- फोटो : SAHARANPUR
शिव चरण शर्मा- फोटो : SAHARANPUR
सुभाष धनगर- फोटो : SAHARANPUR
शिव मंदिर- फोटो : SAHARANPUR