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Saharanpur News: तीन लोगों की गवाही से पहुंचे सलाखों के पीछे

Tue, 24 Feb 2026 01:00 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
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सहारनपुर। कुंडा खुर्द गांव में हुए यामीन और तासीन हत्याकांड के मामले में पीड़ित परिवार को नौ साल तीन माह और 11 दिन बाद न्याय मिला। पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास था। हत्याकांड से लेकर 13 दोषियों को सजा होने तक तीन चश्मदीद गवाहों की गवाही सबसे मुख्य रहे, जो अपने बयान अडिग रहे।
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यह था मामला

थाने में दी गई तहरीर के मुताबिक करीब 20 बीघा जमीन पर कब्जे को लेकर संघर्ष हुआ था। विपक्षी मुन्नवर, मुस्तफा, सन्नवर, मुस्तकीम, शौकिन, मोहसीन, अनवर, इस्लाम, गुलजार, जमशेद, प्रवेज, अनवर, राकिब ने हथियारों से लैस होकर यामीन और तासीन पर हमला कर दिया था। दोनों पक्षों को बीच जमीन को लेकर काफी लंबे समय से विवाद चल रहा था। हमले में यामीन और तासीन की मौत हो गई थी। पुलिस ने विवेचना के बाद मामले को अदालत में दाखिल किया।
जान बख्शने की लगाते रहे थे गुहार
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता व मुख्य गवाह इसरार ने कहा कि 12 नवंबर 2016 की सुबह मेरे पिता यामीन और चाचा तासीन, अलीजान, अख्तर, गुलफाम, लियाकत खेत में सफाई और डोल लगा रहे थे। मेरे पिता व चाचा खेत के दूसरी ओर घूम रहे थे। इसी दौरान विपक्षी अपने हाथों में हथियार लेकर आ गए। इसके बाद सभी मेरे पिता और चाचा के पास पहुंचकर गाली गलौज करने लगे। उन्होंने कहा कि यह जमीन हमारी है। इस पर मेरे पिता ने कहा कि खेत हमारा है। इतना सुनते ही विपक्षियों ने उन पर हथियारों से हमला कर दिया। साथ ही फायरिंग भी की।
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हमलावरों से जान बख्शने की गुहार लगाते रहे, लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी। हमले में मेरे पिता यामीन और तासीन की मौत हो गई, जबकि अलीजान, अख्तर और गुलफाम गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद विपक्षी कार्रवाई करने पर जान से मारने की धमकी देने पर वहां से फरार हो गए। अभियोजन पक्ष में गवाहों के रूप में वादी मुकदमा व घायल अन्य दो की गवाही कराई। साथ ही डॉक्टरी परीक्षण और हथियार से हुई फायरिंग को लेकर फाेरेंसिक रिपोर्ट अदालत में दाखिल की। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोषियों को सजा सुनाई।
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हर दिन रहा फैसले का दबाव, अब मिला न्याय
दोषियों को सजा सुनाने के बाद वादी इसरार ने अदालत के फैसले पर खुशी जताई। कहा कि अदालत ने दूध का दूध और पानी का पानी किया है। इस अवधि के दौरान उन पर लगातार समझौते को लेकर भी दबाव बनाया गया, लेकिन न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और आज न्याय मिला।
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