समाज कल्याण को अर्पित रहा स्वामी श्रद्धानंद का सर्वस्व
सहारनपुर। खलासी लाइन स्थित आर्य समाज भवन परिसर में स्वामी श्रद्धानंद का बलिदान दिवस मनाया गया, जिसमें स्वामी श्रद्धानंद के द्वारा समाज कल्याण के लिए दिए योगदान को याद किया गया।
सर्वप्रथम यज्ञ हुआ जिसके यजमान फतेह सिंह पंचाल रहे। भजनोपदेशक आजाद लहरी ने गीत सुनाकर श्रद्धांजलि पेश की। उन्होंने सुनाया गोलियां सीने पे खाकर चल दिए प्यास कातिल की बुझाकर चल दिए, झुक रही संगीने, सीना तानकर कदम आगे बढ़ाकर चल दिए।
सभा में प्रवचन कर रहे डाक्टर पूर्णचंद शास्त्री ने कहा कि संसार में ऐसे महापुरुष बहुत कम हुए हैं, जिनेहंने अपनी आत्मकथा स्वयं लिखी है। अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानंद का व्यक्तित्व अपूर्व और बेजोड़ था। उन्होंने अपना सर्वस्व समाज के कल्याण के लिए अर्पित कर दिया, वह उस समय समाज में प्रचलित पाखंडों एवं अंधविश्वासों के कारण घोर ना स्तिक बन गए थे, लेकिन बरेली में धर्म, वेद और पुन:जन्म पर महर्षि दयानंद का प्रवचन सुनकर आस्तिक बने और धर्म मार्ग और समाज कल्याण के लिए जीवन समर्पित किया। साथ ही हरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना की जो आज विश्वविद्यालय बन चुका है। कार्यक्रम में प्रधान मूलचंद आर्य, मंत्री दिनेश आर्य, कोषाध्यक्ष डाक्टर राजवीर आर्य, सुरेंद्र कुमार, कृष्णलाल, रमेश राजा, योगराज, डाक्टर विकास आर्य, नरेंद्र आर्य, राजकुमार आर्य, रविकांत आर्य, रोशनलाल, विजय कुमार आर्य और राजगोपाल आदि मौजूद रहे।