सहारनपुर। गन्ना विभाग लाल सड़न रोग से प्रभावित गन्ना प्रजाति को-0238 को रिप्लेस करने में जुटा है। इसके लिए वसंतकालीन गन्ना बुवाई में 19577 हेक्टेयर नई प्रजातियों की बुवाई पर जोर रहेगा। जनपद को शोध केंद्रों से नई प्रजातियां का 2010 क्विंटल बीज आवंटित हुआ है, साथ ही जिले में करीब 19 लाख क्विंटल बीज को भी आरक्षित किया गया है।
उत्पादकता के लिए मशहूर गन्ना प्रजाति को-0238 का जनपद में 90 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रफल रहा है। अच्छे उत्पादन के कारण अधिकांश किसानों की पहली पसंद इस गन्ने की खेती रही है, लेकिन गन्ने की इस प्रजाति में लाल सड़न रोग का प्रकोप लगातार बढ़ने के चलते इसके उत्पादन में गिरावट आई है, साथ ही अधिक कीटनाशकों का प्रयोग होने से गन्ना फसल की लागत में भी इजाफा हो रहा है। इसके चलते गन्ना विभाग इसे रिप्लेस करने में जुटा है। इसके लिए न सिर्फ जनपद में ही उन्नतशील गन्ना प्रजातियों के 19 लाख क्विंटल बीज आरक्षित किया गया है, बल्कि शोध केंद्रों से भी 2010 क्विंटल बीज का आवंटन हुआ है।
जनपद में 19577 हेक्टेयर क्षेत्रफल में वसंतकालीन गन्ना बुवाई कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गन्ना विभाग का को-0238 के स्थान पर नई एवं उन्नतशील गन्ना प्रजातियों की बुवाई पर जोर है। इनमें कोशा-13235, कोलख-14201, को-15023 आदि प्रजातियां भी शामिल हैं।
जनपद में गन्ने की को-0238 प्रजाति में लाल सड़न रोग का प्रकोप बढ़ने से इसको अन्य नई एवं उन्नतशील प्रजातियाें से रिप्लेस किया जा रहा है। इसके लिए शोध केंद्रों से 2010 क्विंटल गन्ना बीज का आवंटन हुआ है। इसके अलावा 19 लाख क्विंटल नई प्रजातियों के बीज को जनपद में आरक्षित किया गया है।
- सुशील कुमार, जिला गन्ना अधिकारी
-शोध केंद्रों से उन्नतशील प्रजातियों के बीज का आवंटन
प्रजाति - क्विंटल
कोशा -13235 -900
कोलख- 14201 - 650
को-15023 50
को-0118 - 110
कोशा- 8272 -100
कोशा-16232 150
कोशा- 12232 -50
नोट: गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार