सहारनपुर। मंडल में गन्ना सर्वे तकरीबन पूरा हो गया है। इस बार सर्वे में शामली जिले ने अच्छी प्रगति दिखाई है। शामली जिले के गन्ना रकबे में वृद्धि हुई है। हालांकि सहारनपुर और मुजफ्फरनगर में रकबे कुछ कमी आई है। मंडल में इस बार 3,69,305 हेक्टेयर में गन्ना फसल लगाई गई है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जिले में गन्ना को प्रमुख और नकदी फसल माना जाता है। किसान अपने खेतों में प्रमुख फसल के रूप में गन्ने को ही लगाते हैं। गन्ना विभाग किसानों को फसल में लगने वाले कीटों और उनसे बचाव के प्रति जागरूक करने में लगा है। पिछले वर्ष गन्ने के रकबे की बात करें तो मंडल में गन्ने का रकबा 3.75 लाख हेक्टेयर था। इस बार इसमें करीब चार हजार हेक्टेयर की कमी आई है। विभाग को विश्वास है कि गन्ने की फसल इस बार अच्छी है। ऐसे में पैदावार और चीनी रिकवरी अच्छी होने की उम्मीद है।
गन्ना सर्वे में सहारनपुर में जिले में इस बार 1.16 लाख हेक्टेयर, मुजफ्फरनगर में 1.75 लाख हेक्टेयर और शामली में 79,462 हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की फसल लगाई गई है। शामली जिले में पिछले दो वर्षों में चार हजार हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2024-25 में शामली जिले में 75,995 हेक्टेयर में गन्ने की फसल लगाई गई थी। पिछले पेराई सत्र में 79,058 हेक्टेयर गन्ना का रकबा रहा था। इस बार भी 462 हेक्टेयर रकबा बढ़ा है। पिछले वर्ष सहारनपुर में गन्ने का रकबा 1.19 लाख व मुजफ्फरनगर में 1.76 लाख हेक्टेयर था।
- प्रजाति बदलाव में जुटा है विभाग
जिले में गन्ने की वैरायटी सीओ-0238 को बदला गया है। इस प्रजाति में रेड रॉट बीमारी का प्रकोप आ गया था, जिसे गन्ने का कैंसर भी कहा जाता है। प्रकोप आने के बाद गन्ना विभाग का नई प्रजाति के प्रसार और उपचार के चलते किसान नई और उन्नतशील प्रजाति को अपना रहे हैं।
मंडल में गन्ना सर्वे तकरीबन पूरा हो गया है। इस बार अभी तक आंकड़ों के अनुसार 3.69 लाख हेक्टेयर गन्ने का रकबा है। विभाग लगातार किसानों को नई और उन्नतशील प्रजातियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
- ओपी सिंह, उप गन्ना आयुक्त सहारनपुर मंडल