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मूल्य नहीं बढ़ने से घाटे का सौदा बनी गन्ने की खेती

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सहारनपुर। लगातार दूसरे वर्ष भी गन्ना मूल्य में एक भी पैसे नहीं बढ़ोतरी नहीं होने से किसानों में निराशा व्याप्त है। उन्होंने प्रदेश सरकार पर किसानों की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कि इस रेट पर गन्ने की खेती घाटे का सौदा बन जाएगी। उन्होंने कहा कि लगातार महंगाई बढ़ रही है। इसके बावजूद पिछले दो सीजन में गन्ना मूल्य नहीं बढ़ने से प्रदेश सरकार की मंशा साफ हो जाती है।
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उत्तर प्रदेश गन्ना संघ के पूर्व चेयरमैन और वरिष्ठ सपा नेता चौधरी राजपाल सिंह ने घोषित गन्ना मूल्य को किसानों के साथ छल बताया। उन्होंने कहा कि इस भाव पर तो गन्ने की फसल पर होने वाला खर्च भी पूरा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा सीजन में कम से कम 400 से 450 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक ओर तो सरकार किसानों की आय दुगना करने की बात कह रही है दूसरी तरफ उन्हें फसलों का उचित मूल्य भी नहीं दिया जा रहा है। सपा इसे बर्दाश्त नहीं करेगी।
पश्चिमी उतर प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने कहा कि गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाना भाजपा को महंगा पड़ेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि इस तरह किसानों की आय दुगना कैसे होगी। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो किसानों को छह सौ रुपये प्रति क्विंटल तक आसानी से दे सकती है, लेकिन सरकार की गलत नीतियों के चलते किसानों को फसल का लाभकारी मूल्य तो दूर लागत मूल्य भी दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनाव में वादा किया था कि गन्ना मूल्य का भुगतान 14 दिनों के अंदर करा दिया जाएगा। इस वादे पर भी सरकार खरी नहीं उतर रही है। किसान नेता अतुल फंदपुरी ने कहा कि लगातार दूसरे सीजन में भी गन्ना मूल्य में कोई वृद्धि नहीं होने से भाजपा सरकार की किसान विरोधी मानसिकता उजागर होती है। गांव फंदपुरी में हुई बैठक में उन्होंने कहा कि किसानों को प्रदेश सरकार से काफी उम्मीद थी, लेकिन गन्ना मूल्य नहीं बढ़ने से किसानों में निराशा व्याप्त हो गई है। साहिल ठक्कर, विपिन पंवार, बसंत राठी, अजय राठी, हिमांशु, सरफराज, इमरान, अनिरुद्ध, रजत आदि मौजूद रहे।
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