सहारनपुर में संक्रामक रोगों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। एसबीडी जिला अस्पताल में सबसे अधिक मरीज फिजीशियन की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। 50 से अधिक मरीजों को गंभीर अवस्था के चलते भर्ती करना पड़ रहा है। नतीजा यह है कि जिला अस्पताल के वार्डों में मरीजों के सामने बेड कम पड़ गए हैं।
आलम यह है कि एक-एक बेड पर दो से तीन मरीज लिटाने पड़ रहे हैं। बरामदे तक को वार्ड में तब्दील कर दिया गया है। पिछले करीब डेढ़ महीने से संक्रामक रोगों ने लोगों को अपनी चपेट में लिया हुआ है। सरकारी अस्पतालों के साथ ही निजी अस्पतालों में भी मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं।
जिला अस्पताल की तमाम ओपीडी में सबसे अधिक मरीज फिजीशियन के पास पहुंच रहे हैं। सुबह आठ बजे से ही मरीजों की कतारें लग रही हैं। जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि इन दिनों संक्रामक रोगों के 200 से 250 मरीज प्रतिदिन ओपीडी में पहुंच रहे हैं, जिनमें 80 फीसदी मरीज संक्रामक रोगों से ग्रस्त हैं।
इनमें से गंभीर हालत के चलते प्रतिदिन करीब 50 मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है, जबकि शेष को दवाएं दी जा रही हैं। संक्रामक रोगियों में 15 से 20 फीसदी मरीज टाइफाइड के निकल रहे हैं, जबकि पांच से दस प्रतिशत मरीज मलेरिया के सामने आ रहे हैं। अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार को जिला अस्पताल की ओपीडी और वार्डों का हाल जानने का प्रयास किया।
ओपीडी के बाहर चिकित्सक के बैठने से पहले सौ से अधिक मरीज कतार में लगे नजर आए। वार्डों की हालत इससे भी खराब थी, जहां एक-एक बेड पर दो से तीन मरीज लेटे मिले। एक बेड पर दो से तीन मरीज होने की वजह से मरीजों को खासी परेशानी हो रही है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बरामदे तक को वार्ड में तब्दील कर दिया गया है।
संक्रामक रोगों के और फैलने का खतरा
संक्रामक रोग जैसे के एक व्यक्ति से दूसरे में फैलने का खतरा रहता है। ऐसे हालात में एक बेड पर दो से तीन मरीजों को लिटाने से रोगों के एक व्यक्ति से दूसरे में फैलने का खतरा रहता है। तीमारदारों ने भी इस पर आपत्ति व्यक्त की है। तीमारदार विमलेश और इमरान ने बताया कि उनके मरीज दो दिन से भर्ती हैं, जिनको दूसरे मरीजों के साथ उनके बेड पर लेटाया गया है। ऐसी स्थिति में दूसरे मरीज की कोई गंभीर बीमारी दूसरे मरीज को लग सकती है। सुनील कुमार ने भी ऐसी ही समस्या बताई है।
चिकित्सा विभाग इस बार संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए शुरू से ही अलर्ट रहा है। हमारी टीमें और मैने खुद गांव और गलियों में जाकर एंटी लार्वा का छिड़काव कराया है। लोगों को जागरूक करने के लिए पखवाड़े और अभियान भी चलाए गए हैं। यही वजह है कि इस बार संक्रामक रोगियों की संख्या गत वर्षों की तुलना में काफी कम है। लोगों को भी चाहिए कि वह संक्रामक रोगों से बचने के लिए साफ-सफाई अपनाएं।
डॉ. शिवांका गौड़, जिला मलेरिया अधिकारी।
संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए चिकित्सा विभाग की ओर से इस बार भी प्रयास किए गए हैं, जिनका असर भी देखने को मिला है। गत वर्षों की तुलना में इस बार संक्रामक रोगियों की संख्या काफी कम है। जनपद के लोगों से अपील है कि यदि उन्हें या उनके परिजनों को बुखार या अन्य संक्रामक रोगों की शिकायत है तो वह तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर चिकित्सक से सलाह लें और इलाज कराएं। हमारे पास पर्याप्त मात्रा में दवाएं और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं।
डॉ. बीएस सोढ़ी, सीएमओ।