सहारनपुर। हिंदी हैं हम अभियान के तहत हिंदी दिवस पर डीएवी पब्लिक स्कूल रसूलपुर में सुलेख प्रतियोगिता कराई गई। इसमें 300 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। इसमें विद्यार्थियों ने अपनी लेखन कला की प्रतिभा दिखाई और सुंदर लेखन पर कक्षाओं में तालियां बटोरीं। प्रतियोगिता के टॉप दस विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया जाएगा।
प्रतियोगिता में नर्सरी कक्षा से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया। कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए प्रतियोगिता कक्षाओं में ही कराई। छोटे बच्चों को शिक्षकों ने बोर्ड पर हिंदी लिखकर नकल करने को दी। कई बच्चों ने सुंदर लेखन का प्रयास किया। कक्षा छह से अधिक की कक्षाओं के विद्यार्थियों ने निबंध, कविता और कहानी लेखन किया। स्कूल की पहली मीटिंग हिन्दीमय बनी रही। प्रतियोगिता में शामिल 300 से अधिक विद्यार्थियों के लेखन पत्र इकट्ठा हुए हैं, इनमें से टॉप 10 का चयन किया। इसके अलावा विद्यार्थियों ने ग्रीटिंग कार्ड भी बनाए। कई विद्यार्थी अपने शिक्षक के लिए ग्रीटिंग कार्ड बनाकर पहुंचे। इनको डिस्प्ले बोर्ड पर लगाया। प्रतियोगिता के सफल आयोजन में शिक्षक चेतना सारस्वत, ऊषा जोशी, मधु कौशिक, अनुपमा शर्मा, पूजा त्यागी, पूजा गेरा, स्वाति शर्मा, नीरज ठकराल, प्रवीन कुमार, संदीप सिंह, गगन गुप्ता, एके गोयल, मनु शर्मा आदि का सहयोग रहा।
उत्साहित दिखे प्रतिभागी छात्र
कक्षा नौ की एंजल प्रतियोगिता के बाद खासी उत्साहित दिखी। एंजल ने बताया कि इस तरह के आयोजन से कुछ ना कुछ अलग सीखने का मौका मिलता है। प्रतियोगिता का हिस्सा बनकर अच्छा लगा।
कक्षा छह की राधिका वालिया ने बताया कि अच्छे लेखन पर उसे अपनी शिक्षकों से सराहना मिलती रही है। हिंदी सुलेख प्रतियोगिता में अच्छा लिखने की कोशिश की है। ऐसे आयोजन होते रहने चाहिए।
कक्षा आठ के अरशद ने बताया कि उन्हें एक दिन पहले ही प्रतियोगिता के बारे में सूचना मिली थी। ऐसे में कोई खास तैयारी नहीं थी, फिर भी अपनी तरफ से शत प्रतिशत देने का प्रयास किया गया है।
कक्षा आठ के ही तनिष्क ने बताया हिंदी में लिखना और बोलना अच्छा लगता है। अपनी बात को जितनी सरलता के साथ हम हिंदी में दूसरे के सामने रख सकते हैं वह किसी अन्य भाषा में नहीं।
हिंदी सुलेख प्रतियोगिता में 300 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। अच्छी बात यह है कि ज्यादातर विद्यार्थियों ने न केवल सुंदर लिखा है, बल्कि वर्तनी का भी ध्यान रखा है। मेरा प्रयास है कि विद्यार्थी अंग्रेजी तो सीखें ही, मगर अपनी मातृभाषा से दूर न हों। - जगदीश सिंह, प्रधानाचार्य, डीएवी पब्लिक स्कूल, रसूलपुर।
बेहट़ रोड़ स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल में हिन्दी है हम के तहत सुलेख लेखन कार्यक्रम में बनाये गये हि- फोटो : SAHARANPUR