कॉलेेजों द्वारा किए गए गोलमाल के चक्रव्यूह में छात्रों को भविष्य फंस गया है। समाज कल्याण निदेशालय द्वारा 21 कॉलेजों को काली सूची में डाले जाने से इन कॉलेजों के उन गरीब छात्रों की पढ़ाई तो बीच में ही छूट जाएगी जो सिर्फ शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति के भरोसे ही शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। अगले पांच साल तक इन कॉलेजों को कोई सहायता मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति के घोटाले में फंसे 21 कॉलेजों को समाज कल्याण निदेशालय द्वारा ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इन कॉलेजों में लगभग 10 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं।
निदेशालय की इस कार्रवाई से इन कॉलेजों में पढ़ रहे हजारों गरीब छात्र-छात्राओं का भविष्य दांव पर लग गया है। हजारों ऐसे गरीब छात्र-छात्राएं हैं, जो केवल वजीफे के बल पर ही पढ़ाईं कर रहे हैं। नियमानुसार इन कॉलेजों को पांच साल तक शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति नहीं दी जाएगी। जबकि कॉलेज अपनी फीस छात्रों से इसी शर्त पर जमा कराते हैं कि उन्हें शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति मिल जाएगी।
कई छात्र तो ऐसे हैं जिन्होंने साहूकारों से कर्ज लेकर कॉलेेजों की भारी भरकम फीस सिर्फ इसी उम्मीद में चुकाई कि उन्हें बाद में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति मिल जाएगी लेकिन 21 कॉलेजों पर ब्लैकलिस्टेड का ठप्पा लगने के बाद इनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। हालांकि कुछ कॉलेज हाईकोर्ट में अपील कर बचने का प्रयास कर रहे हैं।
मिलेनियम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के चेयरमैन संजीव अरोड़ एवं सहारनपुर इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज के सचिव जुबेर आलम ने दावा किया कि कोर्ट ने उन्हें राहत दी है। हालांकि अभी तक कोर्ट का कोई आदेश नहीं है।
शासन से राहत पर संशय
कॉलेजों के घपले में फंसे छात्रों को शासन से फिलहाल कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। कालेजों द्वारा लगातार छात्रों को आश्वासन दिया जा रहा है कि उनका कॉलेज काली सूची से बाहर आ जाएगा। वह पूरा प्रयास कर रहे हैं लेकिन शासन से राहत नहीं मिली तो छात्रों के लिए परेशानी हो जाएगी।
पांच साल तक नहीं मिलेगा वजीफा
प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी यश वर्मा का कहना है कि निदेशालय के नियमानुसार पांच साल तक काली सूची में शामिल कॉलेजों और छात्रों को कोई सरकारी लाभ नहीं मिल सकेगा। फिर भी निदेशालय से जो भी निर्देश प्राप्त होंगे उनका पालन कराया जाएगा।