सहारनपुर। खनन को लेकर एनजीटी (राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण) द्वारा लगाए गए जुर्माने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में डाली गई याचिका पर सुनवाई हुई है। उसमें प्रधान स्टोन क्रशर के संचालक और तीन पट्टाधारकों पर लगे जुर्माने को अव्यवहारिक माना गया, जबकि बसपा एमएलसी महमूद अली और अमित जैन पर लगे जुर्माने के मामले का निस्तारण नहीं हुआ है।
गौरतलब है कि यमुना नदी से अवैध खनन को लेकर फरवरी 2016 में एनजीटी ने प्रधान स्टोन क्रशर पर ढाई करोड़ रुपये जुर्माना लगाया था, जबकि अवैध खनन को लेकर बसपा एमएलसी महमूद अली, अमित जैन, वाजिद अली, दिलशाद और विकास अग्रवाल पर 50-50 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया गया था। इससे पहले इस मामले में केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट भी अवैध खनन को लेकर सामने आई थी। जुर्माना लगाने की कार्रवाई गुरप्रीत सिंह बग्गा की तरफ से एनजीटी में की गई शिकायत के आधार पर हुई थी।
इसको चुनौती देते हुए प्रधान स्टोन क्रशर के संचालक नौशाद और अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें गुरप्रीत सिंह बग्गा को भी पार्टी बनाया गया। स्टोन क्रशर संचालक के अधिवक्ता की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका की सुनवाई में तर्क दिया गया कि स्टोन क्रशर सिर्फ पत्थर तोड़ने का कार्य होता है, उसके नाम खनन का कोई पट्टा नहीं है। इस लिहाज से प्रधान स्टोन क्रशर पर लगाया गया जुर्माना गलत है। इसी तरह वाजिद अली, दिलशाद और विकास अग्रवाल के अधिवक्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि उनका पट्टा सलोनी नदी पर है, जो यमुना नदी से करीब 30 किलोमीटर दूरी पर है। इसी तर्क के आधार पर दिलशाद, वाजिद और विकास अग्रवाल पर लगे जुर्माने को भी अव्यवहारिक बताया गया। जबकि महमूद अली और अमित जैन पर लगे जुर्माने के खिलाफ दायर याचिका का निस्तारण नहीं हुआ है। स्टोन क्रशर संचालक नौशाद का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने उनके साथ ही तीन पट्टाधारकों पर लगाए जुर्माने को अव्यवहारिक माना है।