पर्यूषण पर्व के सातवें दिन सभी जैन मंदिरों में उत्तम तप धर्म की पूजा अर्चना की गई। मंदिरों में सुबह के समय श्री जी का अभिषेक, नित्य नियम पूजन तथा दशलक्षण धर्म की पूजा के साथ महाआरती भी की गई।
बृहस्पतिवार को भगवान पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर सरागवाडा, मंदिर जी बाहरा, मंदिर जी नेचलगढ़ और भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर कानूनगोयान में उत्तम तप धर्म धूमधाम से मनाया गया।
जैन संत प्रदीप शास्त्री पीयूष ने श्रद्धालुओं को उत्तम तप धर्म से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि करोड़ों जन्मों तक जो कर्म नष्ट नहीं होते। जबकि, ज्ञानी के मन वचन कार्य के संयम से तपस्या करने से एक साथ करोड़ों पाप कर्म एक क्षण मात्र में नष्ट हो जाते है।
उन्होंने कहा कि संयम ग्रहण करने के साथ-साथ मनुष्य को स्वाध्याय भी करना चाहिए, क्योंकि ग्रंथों के माध्यम से ही जिनेंद्र देव ने जिस धर्म को कहा उसका पता चलता है।
प्रदीप शास्त्री ने कहा कि आज स्मार्ट वर्क का जमाना है। इसलिए धर्म में भी स्मार्ट बनना चाहते हो तो नित्य ग्रंथ पढ़कर स्वाध्याय करना चाहिए। यही मनुष्य के लिए सच्ची तपस्या है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को तीर्थंकरों और मुनियों द्वारा की जाने वाली तपस्या की भी जानकारी दी। इस अवसर पर श्री दिगंबर जैन मंदिर में महाआरती के उपरांत तंबोला कार्यक्रम भी कराया गया, जिसमें लोगों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।