- सर्दी से आलू, टमाटर और अन्य सब्जी की फसलों को नुकसान
- जिले में करीब 7,300 हेक्टेयर क्षेत्रफल में उगाई जाती हैं सब्जियां
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। जो धुंआ पराली जलाने पर किसान का दुश्मन बन जाता है, वही धुआं अब किसानों का साथी बनेगा। माना जाता है कि धुंआ वातावरण में गर्माहट पैदा कर फसलों के लिए सुरक्षा कवच तैयार करता है। कृषि विज्ञान केंद्र ने फसलों को पाले और सर्दी से बचाने के लिए किसानों को धुएं का सहारा लेने की सलाह दी है। वह सल्फर का इस्तेमाल कर सकते हैं। जनपद में करीब 7,300 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सब्जियों की खेती होती है। इनमें आलू, टमाटर, फूल गोभी, भिंडी, खीरा, बींस, बैंगन, करेला, लौकी, कददू, मटर, शलजम, मूली, गाजर, पत्तागोभी सहित अन्य सब्जियां शामिल हैं।
सहारनपुर सब्जियों का निर्यात भी करता है। उत्तराखंड और दिल्ली में सबसे अधिक सब्जियां जाती हैं। वर्तमान में आलू, टमाटर सहित अनेक सब्जियों की खेती हो रही है, लेकिन पिछले कई दिनों से जनपद में हो रही ठंड का सब्जियों पर विपरीत असर पड़ रहा है। आलू और टमाटर सहित अन्य सब्जियों में पाले का अधिक नुकसान दिखाई दे रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र और फसल सुरक्षा विभाग के अधिकारी ने बताया कि सर्दी का असर सबसे अधिक उन फसलों पर पड़ता है, जिनकी जड़ में नमी की कमी रहती है। इसलिए सब्जियों सहित गेहूं आदि की फसलों को भी सर्दी और पाले से बचाने के लिए दिन के समय हल्की सिंचाई करें। पत्ते वाली फसलों, जिनमें ज्यादातर सब्जियां हैं को घास या पॉलिथीन से ढक दें।
सर्दी का दुष्प्रभाव फसलों पर पड़ रहा है। किसानों को चाहिए वह पत्ते वाली सब्जियों को घास या पॉलिथीन आदि से ढक दें। फसलों को सर्दी और पाले से बचाने के लिए धुआं भी कारगर रहता है। खेत में ऐसी जगह आग जलाएं, कि धुआं फसल के ऊपर रहे। इसमें सल्फर भी होना चाहिए। उससे मौसम में गर्माहट आती है, जो फसलों को सर्दी से बचाती है। - डॉ. आईके कुशवाहा, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र