स्मार्ट सिटी योजना के तहत सहारनपुर के प्रस्ताव को प्रदेश सरकार ने बिना किसी टिप्पणी के पास कर दिया है। 30 जून को यह प्रस्ताव केंद्र सरकार की कमेटी के समक्ष दाखिल किया जाना है, जिसकी तैयारी में सहारनपुर जुट गया है।
पहले चरण में पिछड़ने के बाद सहारनपुर को प्रस्ताव संशोधित कर पुन: दाखिल करने का एक और मौका दिया गया था। ऐसे में सहारनपुर ने तमाम खामियों को दूर कर प्रस्ताव को संशोधित किया।
24 जून को प्रस्ताव प्रदेश सरकार की कमेटी के समक्ष लखनऊ में पेश किया गया। नगरायुक्त डॉ. नीरज शुक्ला और कंसलटेंट एजेंसी के प्रमुख कुंवर सुरजीत सिंह लखनऊ पहुंचे थे। प्रेजेंटेशन के लिए सहारनपुर को पूरा दिन दिया गया।
प्रदेश सरकार ने प्रस्ताव को देखने के बाद बिना किसी आपत्ति और सुझाव के पास कर दिया। सरकार ने प्रस्ताव को पास करने का पत्र भी जारी कर दिया है, जो 30 जून को प्रस्ताव के साथ केंद्र सरकार की कमेटी के समक्ष दिल्ली में दाखिल किया जाएगा।
सहारनपुर को नगरवासियों से साढ़े तीन लाख सुझाव प्राप्त करने का लक्ष्य मिला था। जनता से सुझाव पाने के लिए जन सहभागिता अभियान चलाया हुआ है। साथ ही दो फर्मों को सुझाव लेने के लिए अधिकृत किया गया है।
फर्म के कर्मचारी शहर में जगह-जगह कैंप लगाकर लोगों से सुझाव प्राप्त कर रहे हैं। सुझाव लेने का काम एक जून से चल रहा है। एक महीने में केवल 86 हजार सुझाव ही जुटाए जा सके हैं, जबकि प्रस्ताव कल यानी 30 जून को दाखिल किया जाना है।
ऐसे में जन सहभागिता के क्षेत्र में भी सहारनपुर की हालत ठीक नहीं है, जिसके दस अंक निर्धारित हैं। योजना के तहत दौड़ में शामिल शहरों का अंकों के आधार पर चयन किया जाना है।
योजना के अनुसार 60 नंबर प्रस्ताव, 30 नंबर इंफ्रास्ट्रक्चर और दस नंबर जन सहभागिता के हैं। प्रस्ताव प्रदेश सरकार की ओर से पास किया जा चुका है, जिसमें कोई खामी नजर नहीं आ रही है, मगर इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में सहारनपुर अन्य शहरों की तुलना में पिछड़ा हुआ है।
इंफ्रास्ट्रक्चर में शहरी जनता को मिल रही मूल सुविधाएं जैसे सिटी बस सेवा, नगर निगम की ओर से शत प्रतिशत घरों में पेयजल उपलब्धता, बिजली में शत प्रतिशत मीटरीकरण, कूड़ा प्रबंधन समेत अनेक चीजें शामिल हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर के 30 अंक हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में पिछड़ने होने का मतलब है चयन की राह मुश्किल होना।