सहारनपुर। 13 अगस्त को विश्व अंगदान दिवस है। अंगदान लोगों की जिंदगी को बचाता है। अंगदान करने वालों की संख्या में भले ही इजाफा नहीं हुआ हो, लेकिन यहां ऐसे भी है, जिन्होंने अपनी जिंदगी की परवाह न करते हुए अपनों की जान बचाई। किसी ने भाई के लिए किडनी दी किसी ने पत्नी को किडनी देकर मिसाल कायम की। अपनी जिंदगी की परवाह न करते हुए अपनों को बचाने के लिए यदि कोई व्यक्ति अपना अंग दान करे तो वह किसी मसीहा से कम नहीं होता है।
बहन ने भाई के लिए दी किडनी
शिव विहार निवासी अमित वर्मा 51 साल के हैं। वर्ष 2019 में उनकी दोनों किडनी खराब हो गई थी। चिकित्सकों ने किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी। परिजनों की परेशानी बढ़ गई। ऐसे में उनकी बहन शालिनी वर्मा किडनी देने के लिए तैयार हो गई। बहन ने भाई को मार्च 2021 में किडनी देकर नया जीवन दिया। हालांकि, अमित वर्मा के बहनोई भी किडनी के लिए तैयार हुए थे, लेकिन उनका ब्लड ग्रुप नहीं मिला था। अमित बताते हैं कि उनकी बहन ने उनके लिए जो किया है यह उनके किसी जन्म के अच्छे कर्मों का फल है।
पत्नी को दी थी किडनी, दोनों स्वस्थ
मलेरिया विभाग में सीनियर मलेरिया निरीक्षक के पद पर तैनात मनोज कौशिक ने अपनी को किडनी दी थी। डॉक्टर ने किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी। मनोज को अपनी पत्नी की समय-समय पर डायलिसिस करानी पड़ती है। हालांकि, दोनों स्वस्थ है। मनोज का कहना है कि डॉक्टर की सलाह के बाद दिल्ली में किडनी ट्रांसप्लांट हुई थी।
अंगदान के लिए 18 साल से ज्यादा होनी चाहिए आयु
सीएमओ डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि अंगदान में 18 साल से अधिक आयु होनी चाहिए। जीवन स्वस्थ रहते हुए भी अंगदान कर सकते हैं। गुर्दा, फेफड़ा, लिवर का एक हिस्सा दान कर भी जीवन जी सकते हैं। लेकिन यह अंगदान वह सिर्फ अपने परिजन या किसी करीबी रिश्तेदार को ही कर सकता है। यदि किसी दूसरे व्यक्ति का अंग चाहिए तो ऐसा उसकी मौत के बाद ही हो सकता है। दूसरे जिंदा व्यक्ति का अंग अन्य व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता है।