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सर, आग लगने पर जान बचाएं, या फिर आग बुझाएं 

Thu, 18 Apr 2019 11:55 PM IST
Prag Gupta ब्यूरो, सहारनपुर
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अमर उजाला के अपराजिता अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में आग बुझाने की ट्रेनिंग लेती छात्रा। - फोटो : अमर उजाला
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सर, आग लगने पर उसे बुझाएं या फिर जान बचाएं। आग से बहुत डर लगता है, आग बुझाना तो दूर, उसके पास जाने की हिम्मत नहीं होती, तो फिर आग पर काबू कैसे पाएं। किस प्रकार की आग को किस प्रकार बुझाया जा सकता है। आग से बचाव की जानकारी दे रहे अधिकारियों से छात्र-छात्राओं ने इसी तरह के सवाल खूब पूछे। अधिकारियों ने उनके सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासा को शांत किया।
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देहरादून रोड स्थित पंडित आरसी शर्मा मेडिकल कॉलेज में अमर उजाला फाउंडेशन की मुहिम अपराजिता के तहत बृहस्पतिवार को आग से बचाव के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अग्निशमन अधिकारी तेजवीर सिंह और उनकी टीम ने न सिर्फ छात्र-छात्राओं को आग से बचाव की जानकारी दी, बल्कि रसोई गैस सिलिंडर, डीजल, पेट्रोल में लगी आग को कपड़े एवं अग्निशमन यंत्र से बुझवाकर दिखाया। यही नहीं छात्राओं से भी आग बुझवाकर उनकी हिम्मत बढ़ाई।

मुख्य अग्निशमन अधिकारी तेजवीर सिंह ने कहा कि आग लगने पर सबसे पहले स्वयं को सुरक्षित करें, फिर आग की स्थिति और उसका प्रकार जानें। उन्होंने बताया कि आग पांच तरह की होती है और हर तरह की आग को अलग-अलग तरीके से बुझाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि पहली आग सामान्य आग होती है, जो लकड़ी, गत्ता, कागज, कपड़े में लगती है। ऐसी आग का सीधे पानी डालकर बुझाया जाता है। दूसरी आग पेट्रोलियम पदार्थों की होती है। जो पानी डालने से नहीं बुझती। इसके लिए अग्निशमन यंत्र एएफएफएफ (एक्वा फिल्म फार्मिंग फोम) का प्रयोग किया जाता है। 
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तीसरी गैसीय आग होती है। रसोई गैस सिलिंडरों में आग लग जाती है। यह सूती भीगे कपड़े को जोर से मारकर, रेत, बालू से भी सिलेंडर से निकलती आग बुझाई जा सकती है। जबकि इसे ड्राई केमिकल पाउडर से बुझाया जाता है। चौथी आग मैटेलिक आग होती है। इस आग को भी स्टोर्ड प्रेशर ड्राई केमिकल पाउडर से ही बुझाया जा सकता है। इसके बाद आती है इलेक्ट्रिक फायर।

शार्ट सर्किट से लगी आग को बुझाने से पहले विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। सबसे पहले मेन स्विच कट कर दें। पूरी तरह से आश्वस्त हो जाएं कि लाइन कट चुकी है। उसके बाद पानी अथवा रेत से आग पर काबू पाएं। शार्ट सर्किट से लगी आग पर सीधे पानी नहीं डाला जा सकता। इससे करंट आने का खतरा रहता है। आग लगने पर घबराने की बजाय साहस दिखाने की जरूरत होती है।

कार्यक्रम में प्रबंधक रूपचंद शर्मा, सहायक प्राचार्य डाक्टर सीमा शर्मा, डाक्टर आशीष सैनी, डाक्टर जावेद, डाक्टर हुमैरा, डाक्टर शौकीन मलिक, सतीश सैनी, कुलदीप, अक्षिता कपूर, दिनेश, पराग, वैष्णवी, सोनू, शमा, अजीम, नीतू, काजल, विशांत, नरगिश, ललिता, अजय, रजत मौजूद रहे।

सावधानी रखे तो दुर्घटना से बचा जा सकता है - रमन शर्मा
पंडित आरसी शर्मा मेडिकल कालेज के प्राचार्य रमन शर्मा ने कहा कि आग जितनी मित्र है, लापरवाही पर उतनी ही खतरनाक भी है। दुर्घटना से बचने के लिए सावधानी जरूरी है। खासकर रसोई गैस सिलिंडर को लेकर और बिजली के तारों के प्रति सावधानी रखे। रसोई गैस जलाकर अक्सर कुछ लोग भूल जाते हैं, जो दुर्घटना का कारण बन जाता है। कम एंपियर के तार पर अधिक लोड होने पर शार्ट सर्किट हो जाता है। इसका ध्यान रखना जरूरी है।
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 छात्र-छात्राओं के सवाल अधिकारियों के जवाब
- मोहम्मद ताबिश - शरीर के कपड़ों में आग लग जाए तो कैसे बुझाएं ? 
- सीएफओ - सबसे पहले जमीन पर लेट जाएं और जमीन में घिसटते हुए लुढ़ते रहे।
- डाक्टर हुमेरा - घर में रखे कपड़ों में आग लगे तो क्या बचाव है।
-सीएफओ- सबसे पहले अन्य सामान को दूर कर दें और सीधे पानी डालकर आग बुझा दें।
-मोहम्मद मुजाहिर - खेत की फसल में आग लग जाए तो क्या बचाव किया जाए ?
-सीएफओ - सूखी फसल में आग तेजी से फैलती है। तुरंत ट्रैक्टर से खेत को आग से आगे जोत डालें। जिससे आग आगे नहीं बढ़ सकेगी।
अंजू- घर में आग लग जाए तो कैसे बुझाएं ?
-सीएफओ - सबसे पहले बिजली के सभी लाइन काट दें, उसके बाद पानी, रेत और अग्निशमन यंत्र जो भी उपलब्ध हो तुरंत उपयोग करें।
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