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शाकंभरी सिद्धपीठ तक रेल के लिए होगा सर्वे

Tue, 01 Dec 2015 12:12 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सहारनपुर
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श्रद्धालुओं के लिए रेलवे सहारनपुर से शाकंभरी स्थल तक रेल लाइन बिछाने की संभावनाएं तलाशी जा रही है। इस मेले में हर साल यूपी समेत हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश से लेकर अन्य राज्यों के करीब 10 लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। काफी समय से श्रद्धालुओं की मांग पर इसकी संभावना भांपी जा रही है।
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रविवार को उत्तर रेलवे अंबाला मंडल के डीआरएम दिनेश कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि मंडल से लेकर बोर्ड मुख्यालय तक इस सिद्धपीठ स्थल को रेलवे लाइन से जोड़ने का मामला पहुंचा है। इसके लिए जल्द ही सर्वे कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि सहारनपुर स्टेशन पर यात्रियों के लिए दो लिफ्ट, दो प्लेटफार्म बढ़ाने और लकड़ी के पुराने जर्जर पुल की जगह नए ओवरब्रिज की तैयारियां भी चल रही हैं।

उन्होंने बताया कि रेलवे सहारनपुर से ही सटे हरियाणा के जगाधरी से चंडीगढ़ की नई लाइन बिछा रहा है। नारायण गढ़ के रास्ते चंडीगढ़ का सफर आसान हो जाएगा, क्योंकि अंबाला में कई बार ट्रेनों को आगे निकलने में काफी वक्त लगता है। करीब 91 किलोमीटर लंबी इस लाइन पर 900 करोड़ की लागत आएगी। शाकंभरी सिद्धपीठ स्थल के लिए भी संभावना बनी तो इस पर काम होगा।
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सहारनपुर के नागल से लेकर अन्य जगहों पर ट्रेनों के इंजन और कोच में आग की घटनाओं पर उन्होंने कहा कि पुराने डीसी कार्बन वाले ट्रैक्शन मोटर इसका कारण हो सकते हैं। इनकी जगह अब अधिक सुरक्षित माने जाने वाले थ्री फेज मोटर प्रयुक्त करने की कोशिश की जाएगी। ट्रेनों के डिरेल होने के बारे में कहा कि यार्ड एरिया में तो छोटी लाइनों का स्ट्रक्चर भी जिम्मेदार रहा है। इसमें जरूरी बदलाव किया जा रहा है। इसके अलावा लोको, सिग्नल और रेलवे ट्रैक और ऑपरेटिंग से जुड़ी खामियों को दूर कराया जा रहा है। सीसी कैमरे के साथ एल्कोहल टेस्टिंग की कोशिश भी की जा रही हैं।

41 अनमेंड क्रासिंग पर हादसे रोकने को उठाएंगे कदम
डीआरएम ने बताया कि अंबाला मंडल से रोजाना 313 मेल और पैसेंजर ट्रेनें संचालित होती हैं। इनमें रोजाना दो लाख से अधिक यात्री सफर करते हैं। इतने यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से 96 अनमेंड क्रासिंग चिह्नित किए गए हैं। इनमें से 41 अनमेंड क्रासिंग पर हादसों को रोकने के लिए सबवे क्रासिंग, अप्रोच रोड जैसे विकल्प अपनाए जाएंगे।

कोहरे से हादसे रोकने को सेमी आटोमेटिक सिग्नल पर जोर
कोहरे से होने वाले हादसों पर बताया गया कि इससे निपटने के लिए आटोमेटिक सिग्नल की जगह सेमी आटोमेटिक सिग्नल पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही सिग्नल से पहले आने वाले खंभों पर जेबरा टेप जैसे प्रयोग किए जा रहे हैं ताकि लोको पायलट आसानी से सिग्नल से पहले ही चौकन्ना हो जाए। इसके अलावा फॉग सेव डिवाइस का भी सहारा लिया जा रहा है।

सुरक्षा के लिए इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम की भी तैयारी
ट्रेनों और स्टेशनों पर बम या अन्य विस्फोटक सामग्री के इस्तेमाल को समय रहते जांचने के लिए अब रेलवे अपने स्तर पर भी इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम अपनाने की तैयारी कर रहा है। इसमें बम या अन्य विस्फोटक को सक्रिय होने से रोकने के लिए जरूरी विशेषज्ञों की टीम के साथ ही अन्य तकनीकी टीमों की उपलब्धता के प्रयास किए जा रहे हैं। अभी ऐसे काम के लिए केंद्र या राज्य सरकार की सीमित सुविधाओं पर निर्भर रहना पड़ता है।

रिफंड की समस्या को माना, काउंटर बढ़ेंगे
रेल टिकट कैंसिलेशन पर रिफंड के नियमों में किए गए बदलाव पर डीआरएम ने माना कि यात्रियों के सामने दिक्कतें आ रही हैं। लेकिन यह मामला पूरे देश का है। उन्होंने कहा कि यात्रियों की परेशानी कुछ कम करने के लिए काउंटर बढ़ाने की कोशिशें जरूर हो रही हैं। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों के विरोध पर उन्होंने माना कि शायद इन सिफारिशों में उम्मीद से कम लाभ की चिंता के कारण ऐसा हो रहा है।
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