शाकंभरी। पश्चिमी यूपी के विख्यात सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी में सोमवार को पौष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर मां शाकंभरी जयंती (प्राकट्य पर्व) हर्षोल्लास से मनाया गया। शंकराचार्य आश्रम प्रभारी एवं अखिल भारतीय संत संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष भैरवतंत्राचार्य सहजानंद महाराज के सानिध्य में पूर्णाहुति के बाद श्रद्धालुओं ने 56 भोग और 36 व्यंजन माता को अर्पित किए गए। सिद्धपीठ व्यवस्थापक राणा परिवार ने मां का विशेष श्रृंगार कर भोग लगाया।
शिवालिक तलहटी में स्थित श्री शाकंभरी देवी में पिछले एक सप्ताह से जयंती उत्सव की धूम है। भगवती के मंदिर एवं शंकराचार्य आश्रम की भव्य सजावट की गई। पौष माह की पूर्णिमा तिथि को सुबह शाकंभरी जयंती पर्व पर सुबह से ही समूची शिवालिक घाटी भक्ति रस में डूब गई। सिद्धपीठ में सुबह से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी।
भक्तों ने लंबी लाइनों में लगकर माता रानी के दर्शन किए। सात जनवरी से शंकराचार्य आश्रम में चल रहे शतचंडी महायज्ञ का विधिवत समापन हो गया। इससे पहले रात्रि में आश्रम एवं सत्संग भवन में मां का जागरण कर गुणगान किया गया। सोमवार सुबह आश्रम में चले यज्ञ में मंदिर व्यवस्थापक राणा आदित्य प्रताप सिंह एवं संत सहजानंद महाराज के साथ श्रद्धालुओं ने पूर्णाहुति दी।
पूर्णाहुति के बाद पिछले एक सप्ताह से आश्रम में तैयार किए गए छप्पन भोग और 36 व्यंजन आदिशक्ति मां भगवती को अर्पण किए गए। मंदिर व्यवस्थापक राणा परिवार की ओर से पूर्व विधायक रानी देवलता, राणा आदित्य प्रताप सिंह, राणा सानिध्य प्रताप सिंह, कुंवर आतुल्य प्रताप सिंह द्वारा मां की विशेष पूजा अर्चना की गई। इस दौरान पूर्व विधायक नरेश सैनी, पंडित संजय प्रपन्नाचार्य, सतीश गर्ग, हरीश कौशिक, भाजपा नेता राजबीर सिंह, मुकेश राणा आदि रहे।
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जगदजननी हैं माता शाकंभरी देवी
शाकंभरी। संत सहजानंद महाराज ने कहा कि मां की महिमा अनोखी है। मां के बिना भी हमारा कोई अस्तित्व नहीं है। शास्त्रों के अनुसार सबकी मां राजराजेश्वरी ही है। यह कभी नवदुर्गा के रूप में तो कभी शताक्षी, भीमा के रूप में दिखाई देती है। उन्होंने बताया केवल अपनी आत्मशक्ति के द्वारा मां ने इस सारे संसार को उत्पन्न किया अर्थात संसार की उत्पादिता वही मां जगदजननी है उसी ने हमारी मां को उत्पन्न किया जिससे हम उत्पन्न हुए। इसलिए मां शाकंभरी जगदजननी कहलाई।