वैज्ञानिकों में जगी उम्मीद, मिल सकते हैं और जीवाश्म
सहारनपुर। शिवालिक के जंगलों में 50 लाख साल पुराना हाथी का जीवाश्म मिलने से वैज्ञानिकों और वन विभाग के चेहरे पर चमक आ गई है। वन्य जीव वैज्ञानिक और जीवाश्मों पर काम करने वाले वैज्ञानिकों ने शिवालिक में कई राज दफन होने की प्रबल संभावना जताई है। वन विभाग की ओर से जीवाश्मों की खोज के लिए शिवालिक में जीवाश्म वैज्ञानिकों को न्यौता दिया है। दरअसल, हाथी का जो जीवाश्म मिला है, वह हिप्पोपोटेमस, जिराफ, घोड़ा जैसे जीव के जीवाश्मों की मौजूदगी की ओर इशारा करता है। वैज्ञानिक और वन विशेषज्ञ शिवालिक के सीने में दफन ऐसे राज खोजने के लिए पहली बार आएंगे।
हाथी के पूर्वज का जो जीवाश्म मिला है, वह यह बताता है कि 50 लाख साल पहले ही हाथी की प्रजातियों की शुरुआत हो गई थी। जो कुछ समय बाद विलुप्त हो गईं। वैज्ञानिकों ने जीवाश्म की उम्र की सीमा तय की तो यह उसी वक्त मान लिया गया कि शिवालिक वन क्षेत्र में कई जीवाश्म वन्य जीवों के हो सकते हैं। अब वन विभाग सहारनपुर की ओर से वैज्ञानिकों के साथ सहमति सर्वे को लेकर बनी है। यह पहला अवसर होगा, जब जीवाश्म पर काम करने वाले वैज्ञानिक शिवालिक की पहाड़ियों की तलहटी सहित अन्य का सर्वे करेंगे। दरअसल, जीवाश्म पहाड़ियों के टूटने या दरकने के बाद जब तलहटी में गिर जाते हैं तो वैज्ञानिक इसकी पहचान करते हैं। कई बार तेज बहाव में बहकर ये जीवाश्म दूर भी निकल जाते हैं।
अन्य जीवाश्मों से की गई तुलना
हाथी के जीवाश्म के एक हिस्से की वाडिया इंस्टीट्यूट देहरादून के म्यूजियम में रखे गए जीवाश्मों के नमूने से तुलना की गई। जिसमें ये बात सामने आई कि जम्मू की तलहटी, चंडीगढ़ के करीब, हिमाचल प्रदेश के कालाअंब, साकेती में कुछ जीवों के जीवाश्म मिले हैं। ये स्टेगोडॉन नेपाल और पाकिस्तान की तलहटी में भी मिलते हैं। वाडिया के वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि जहां इसकी उपस्थिति होती है, वहां संभवत: बहुत घना जंगल और नदी व नहरें रही होंगी।
और पुख्ता हुई टाइगर रिजर्व की सोच
मुख्य वन संरक्षक वीके जैन ने बताया कि टाइगर रिजर्व को लेकर कवायद की जा रही है। कई दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीव मिले हैं। सभी का डेटा बैंक बनाकर डब्ल्यूडब्ल्यूआई देहरादून को भेज दिया है। सुझाव मिलते ही इस ओर काम शुरू कर दिया जाएगा।
क्या है स्टेगोडॉन
यह प्राचीन हाथियों की एक प्रजाति थी, जिसे स्टेगोडॉन कहा जाता है। इसका एक दांत 12 से 18 फीट का होता था।