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विद्यालय प्रबंधन बेचैन, अभिभावकों को होगा फायदा

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सहारनपुर। निजी स्कूल अब मनमानी नहीं कर सकेंगे। फीस वृद्धि सहित तमाम तरह की जानकारी अभिभावकों को देनी होगी। क्योंकि निजी स्कूलों को सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के दायरे में लाने का राज्य सूचना आयुक्त ने दिया है। इस आदेश से मान्यता प्राप्त विद्यालय संचालकों में बेचैनी है और न्यायालय की शरण लेने की बात कही जा रही है, जबकि अभिभावक इससे खुश नजर आ रहे हैं।
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दरअसल, निजी स्कूलों को आरटीआई के दायरे में लाने फीस वृद्धि से लेकर विद्यालयों में बच्चों को दी जा रही सुविधाओं के बारे में भी सूचना देनी पड़ेगी। इसको लेकर कुछ निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्य सीधे तौर पर विरोध तो नहीं कर रहे हैं, मगर मान्यता प्राप्त विद्यालय महासंघ कह चुका है कि इस आदेश के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा। उधर, अभिभावक इस निर्णय से खासे उत्साहित हैं। उन्हें उम्मीद है कि अब फीस वृद्धि या अन्य चीजों में स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगेगा।
------ अभिभावकों की बात
-- लिंक रोड निवासी गुरमीत कौर ने निजी स्कूलों को आरटीआई के दायरे में लाने का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अभी तक स्कूल अभिभावकों को जानकारी देने से बचते थे। मगर अब ऐसा नहीं होगा।
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-- हकीकतनगर निवासी गौरव सुखीजा का कहना है कि ज्यादातर स्कूल मनमाने तरीके से हर वर्ष पांच से 20 फीसदी तक फीस वृद्धि करते आए हैं। उनसे पूछो कि किस आधार पर बढ़ाई है तो वह सीधे मुंह जवाब नहीं देते हैं। अब उनकी मनमानी रुकेगी।
-- कोर्ट रोड निवासी सरबजीत कौर का कहना है कि स्कूल एक बिजनेस है, जो बच्चों और अभिभावकों की वजह से चलता है। अभिभावकों को स्कूलों से अपने बच्चों से संबंधित जानकारी लेने का अधिकार है। सूचना आयुक्त का निर्णय सराहनीय है।
-- तोता चौक निवासी अर्जुन शर्मा का कहना है कि निजी स्कूलों के आरटीआई के दायरे में आने से चीजों में पारदर्शिता आएगी। साथ ही स्कूलों और अभिभावकों के बीच एक तालमेल बनेगा, जो अच्छी बात है।
------स्कूलों का पक्ष
-- पाइनवुड पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. संजीव जैन का कहना है कि बेशक स्कूल आरटीआई के दायरे में आ जाएं, मगर अभिभावक जिला विद्यालय निरीक्षक के माध्यम से ही जानकारी ले सकेंगे। स्कूल अभिभावकों को सीधे जानकारी देने के लिए बाध्य नहीं किए गए हैं।
-- सरस्वती विहार सीनियर सेकेंड्री स्कूल के प्रधानाचार्य राजीव शुक्ला ने फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि स्कूल बच्चों को लेकर क्या निर्णय ले रहे हैं यह अभिभावकों को पता होना चाहिए। उन्होंने बताया कि इससे कार्यों में पारदर्शिता आएगी। स्कूल और अभिभावकों में विश्वास बढ़ेगा।
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