सहारनपुर। विद्यालयों के जर्जर भवनों को चिह्नित कर ध्वस्तीकरण कराया जाना था। शिक्षा विभाग का दावा है कि चिह्नित जर्जर भवनों में से 90 प्रतिशत ध्वस्त करा दिए गए हैं, लेकिन अब भी जिले में कई ऐसे भवन हैं जो ध्वस्त नहीं कराए जा सके हैं। इन जर्जर भवनों की वजह से हादसा होने का खतरा है।
दरअसल, जनवरी माह में जर्जर विद्यालय भवनों की सूची बनाकर शासन को भेजी गई थी। जिले में करीब 277 जर्जर भवन चिह्नित किए गए थे। सबसे ज्यादा हालत खराब मुजफ्फराबाद ब्लाक में मिली थी, जहां 40 भवन जर्जर हैं। इसके अलावा सरसावा क्षेत्र में 07, नागल क्षेत्र में 18, गंगोह क्षेत्र में 30, साढ़ौली कदीम क्षेत्र में 21, रामपुर मनिहारान क्षेत्र में 08, बलियाखेड़ी ब्लाक क्षेत्र में 13, देवबंद क्षेत्र में 09 भवन चिह्नित किए गए। इनमें से 125 जर्जर भवनों को पहले चरण में ध्वस्त किया जाना था। इनमें कई विद्यालय भवन तो ऐसे हैं, जिनकी छतों पर पेड़ तक उग आए थे। वैसे तो अभी विद्यालयों में बच्चों को नहीं बुलाया जा रहा है, लेकिन शिक्षक, शिक्षिकाओं और अन्य कर्मचारी पहुंच रहे हैं, लेकिन यह जर्जर भवन कभी भी हादसे का सबब बन सकते हैं। जिन स्थानों पर जर्जर भवन रास्ते के नजदीक हैं, वहां से गुजरने के दौरान ग्रामीणों को भी भय रहता है।
विद्यालय भवन पर पीपल का पेड़
बेहट क्षेत्र के गांव उसंड में विद्यालय भवन की दीवार पर पीपल का पौधा उग आया, जो अब वृक्ष का रूप ले चुका है। भवन की दीवार भी जर्जर है। गांव उसंड के रहने वाले श्याम सुंदर ने बताया कि विद्यालय की दीवार जर्जर हो चुकी है और पेड़ भी लगातार बढ़ रहा है। दीवार रास्ते से लगी हुई है, जो कभी भी गिर सकती है। उनकी मांग है कि जर्जर भवन और दीवार को तोड़कर दोबारा से निर्माण कराया जाए, ताकि कोई हादसा न होने पाए।
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चिह्नित जर्जर भवनों में से 90 प्रतिशत को ध्वस्त करा दिया गया है, जो जर्जर भवन रह गए हैं उन्हें भी जल्द ही ध्वस्त कराया जाएगा। -- रमेंद्र कुमार सिंह, बीएसए