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सरकारी नौकरी छोड़कर जा रहे एसबीडी जिला अस्पताल के डॉक्टर

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जिला अस्पताल का गेट - फोटो : SAHARANPUR
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सरकारी नौकरी छोड़कर जा रहे एसबीडी जिला अस्पताल के डॉक्टर
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सहारनपुर। एसबीडी जिला अस्पताल से चिकित्सक सरकारी नौकरी को अलविदा कह रहे हैं। अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था चरमरा रही है। कई चिकित्सकों ने वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्त योजना) के लिए भी आवेदन कर रखा है, लेकिन स्वीकृति नहीं मिल रही है।
अस्पताल की एक महिला डेंटल सर्जन ने बताया कि उन्होंने वीआरएस के लिए आवेदन किया था, लेकिन शासन ने नामंजूर कर दिया। इसके बाद वह बिना बताए नौकरी छोड़कर चली गईं। दो साल पहले एक सर्जन अचानक गायब हो गए थे। बाद में पता चला कि वह मेरठ के मेडिकल कॉलेज से एमडी कर रहे हैं। वहीं एक नेत्ररोग विशेषज्ञ चार माह से गायब हैं। एक महिला नेत्र चिकित्सक एक साल पहले नौकरी छोड़कर चली गईं हैं। महिला पैथोलॉजिस्ट एक दिन का अवकाश लेकर गई थी, लेकिन नहीं लौटीं। अब वह पति के साथ दिल्ली में हैं। अस्पताल में रिटायर्ड फिजीशियन से काम चल रहा था, लेकिन वह भी नौकरी छोड़कर चले गए। विभागीय सूत्रों ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की 50 से 60 फीसदी कमी है। ओपीडी करने के साथ कई तरह का बोझ भी रहता है। इस वजह से चिकित्सक अपने परिवार को समय नहीं दे पा रहे हैं, पूरा परिवार तनाव में है। इसके अलावा सरकारी चिकित्सक को डेढ़ से दो लाख रुपये वेतन मिलता है, जबकि निजी क्लीनिक या अस्पताल चलाने से कई गुना अधिक पैसा कमा लेते हैं।
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रिकॉर्ड में दर्ज हैं चिकित्सक
अस्पताल छोड़कर गए चिकित्सक बेशक काम पर नहीं हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में वह सहारनपुर में दर्ज हैं। जबकि हकीकत यह है कि एसबीडी जिला अस्पताल में स्वीकृत पदों के सापेक्ष करीब 40-45 फीसदी ही चिकित्सक काम कर रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों ने छोड़कर जा चुके चिकित्सकों का वेतन रोक दिया है।
शासन ने लगाई वीआरएस पर रोक
प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की भारी कमी को देखते हुए शासन ने वीआरएस पर रोक लगा दी थी। शायद यही वजह है कि चिकित्सक बिना बताए छोड़कर जा रहे हैं।
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बीते कुछ साल में एसबीडी जिला अस्पताल से छह-सात चिकित्सक या तो छुट्टी के बहाने या फिर बिना बताए चले गए। दो चिकित्सकों के एमडी करने की सूचना मिली है। इन चिकित्सकों के अस्पताल छोड़ते ही वेतन रुकवा दिया गया था। साथ ही शासन को इन चिकित्सकों की जानकारी देते हुए पत्र लिख दिया है।
- डॉक्टर एसके वार्ष्णेय, प्रमुख अधीक्षक (चिकित्सा)
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