थाना चिलकाना क्षेत्र में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म का मामला झूठा निकला है। रिपोर्ट दर्ज कराने वाला उसका भाई और पीड़िता अपने बयान से पलट गए। पीड़िता बोली कि पुलिस के दबाव में आकर बयान दिए थे। उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म नहीं हुआ है। अदालत ने झूठा मामला दर्ज कराने और कोर्ट को गुमराह करने पर वादी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
अधिवक्ता के मुताबिक, पीड़िता के चचेरे भाई ने 19 सितंबर 2018 को तीन लोगों के खिलाफ उसकी नाबालिग बहन से सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। आरोप लगाया था कि तीनों आरोपी उसकी बहन को घर से उठाकर ले गए और सुनसान जगह पर सामूहिक दुष्कर्म किया। पुलिस ने नामजद किए तीनों लोगों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर जेल भेज दिया था। इनको इस मामले में आठ माह जेल में भी रहना पड़ा है।
मामला अपर सत्र न्यायाधीश पिंकू कुमार की अदालत में विचाराधीन था। अब पीड़िता और उसका भाई अपने बयानों से मुकर गए। उन्होंने अदालत में पुलिस को ही जिम्मेदार ठहरा दिया। आरोप लगाया कि पुलिस के दबाव में उन्होंने बयान दिए थे। अदालत ने सुनवाई के बाद तीनों आरोपियों को बरी कर दिया है, जबकि झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने और अदालत को गुमराह करने के मामले में पीड़िता के चचेरे भाई के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश पुलिस को दिए हैं।
नहीं दिया था कोई ऐसा बयान, लगी 102 तारीख
पीड़िता ने अदालत में कहा कि जांच अधिकारी को उसने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था। पुलिस ने दबाव में लेकर उसके बयान अपनी मर्जी से दर्ज किए। उससे हस्ताक्षर कराए थे। आरोपी पक्ष के अधिवक्ता मुताबिक, इस मामले में 102 तारीखें लगी हैं। वहीं, पुलिस भी अदालत में ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई है। अधिवक्ताओं के बीच बहस हुई थी। मेडिकल में लड़की की उम्र 17 साल निकली थी, जबकि मामला दर्ज कराते हुए उसकी उम्र 12 वर्ष बताई गई थी। मामले में पीड़िता और उसके भाई के बयान भी अलग-अलग थे। वहीं, पीड़िता के परिजनों ने भी आरोपियों के बचाव में एसएसपी को शपथ पत्र दिया था।
एसपी सटी अभिमन्यु मांगलिक का कहना है कि मामले में अदालत ने जो भी आदेश दिए हैं, उनका पालन किया जाएगा। आदेश की कॉपी मिलने पर रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।