एटीएस ने बेहट में छापामारी कर जनसेवा केंद्र संचालक और उसके साथी को पकड़ लिया। दोनों से पूछताछ की जा रही है। बताया जा रहा है कि एटीएस ने कई राज्यों में फैले नेटवर्क पर एकसाथ कार्रवाई की है।
रोहिंग्या का आधार कार्ड बनवाने वाले गिरोह के तार जिले से जुड़े हैं। एटीएस ने बेहट क्षेत्र में छापामारी कर एक जनसेवा केंद्र संचालक और एक ऑपरेटर को हिरासत में लिया है। वे फर्जी आधार कार्ड तैयार करते थे।
विज्ञापन
यूपी एटीएस की टीम ने मऊ, आजमगढ़, औरेया और गाजियाबाद समेत कई स्थानों से आठ लोगों को दो दिन पहले गिरफ्तार किया था। आरोप था कि वह जनसेवा केंद्रों की मिलीभगत से रोहिंग्या के फर्जी दस्तावेज से आधार कार्ड बनवाते हैं। इसी के तहत सहारनपुर एटीएस की टीम ने बेहट में छापामारी करते हुए मझाड़ी और हलालपुर निवासी दो लोगों को हिरासत में लिया है।
एक आरोपी जनसेवा केंद्र चलाता है और दूसरा ऑपरेटर के तहत काम करता है। अभी तक की जांच में सामने आया है कि इनके तार भी उसी गिरोह से जुड़े हुए हैं, जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बाहरी लोगों के आधार कार्ड बनाते थे। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ कि उन्होंने किसी रोहिंग्या का आधार कार्ड बनाया है या नहीं। एटीएस अपने साथ ले गई है। पूछताछ के बाद ही पता चलेगा कि जनसेवा केंद्र संचालक कितने लोगों के आधार कार्ड बना चुके हैं। फिलहाल इसकी अधिकारिक जानकारी एटीएस की तरफ से नहीं दी जा रही।
मझाड़ी से लेकर पड़ोसी राज्यों तक फैला नेटवर्क
मझाड़ी निवासी जिस युवक को एटीएस ने हिरासत में लिया है, उसने चार साल पहले अपने भाई के साथ गांव में ही जनसेवा केंद्र शुरू किया था। दो साल पहले वह एक बैंक की शाखा के प्रबंधक के संपर्क में आया, जिसकी ऑफिशियल आईडी के इस्तेमाल से उसने फर्जी आधार कार्ड तैयार करने शुरू किए।
उसके पास जनसेवा केंद्र पर भीड़ रहने लगी। फर्जी आधार कार्ड तैयार करने की एवज में एक हजार से पांच हजार रुपये तक वसूल रहे थे। दूर दराज से लोग उनके पास आधार कार्ड बनवाने आ रहे थे। एक साल पहले एटीएस के रडार पर आने के बाद उसने छह महीने पहले गांव के जनसेवा केंद्र पर काम करना बंद कर दिया था और आसपास व दूसरे शहरों के अलावा पड़ोसी राज्य उत्तराखंड व हिमाचल में जनसेवा केंद्र संचालकों से संपर्क कर अपना नेटवर्क खड़ा किया।