फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना अरशद
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पवित्र रमजान माह की तरावीह में रकम तय करके कुरान पाक सुनाना और सुनना जायज नहीं है। जो हाफिज इस तरह का काम करते हैं, वो गुनाह में शामिल होते हैं। क्योंकि कुरान सुनाना इबादत है और इबादत की कोई कीमत नहीं होती।