सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर उठाए सवाल
बयान में सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश का भी जिक्र किया गया। नेता के मुताबिक आदेश में 30 दिन का समय दिया गया था, लेकिन 24 तारीख को इस मामले में स्टे हो गया था और करीब 22 दिन की अवधि अभी बाकी थी। इसके बावजूद मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया।
वक्फ को पार्टी नहीं बनाने का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान वक्फ से जुड़े कानूनी प्रावधानों का भी ध्यान नहीं रखा गया। उनका कहना है कि वक्फ को मामले में पार्टी नहीं बनाया गया। उन्होंने वक्फ-ए-यूजर समेत अन्य कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए दावा किया कि इन पहलुओं की भी अनदेखी की गई।
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'खसरा मौजूदा स्थिति बताता है'
इमरान मसूद के बयान में जमीन के खसरा रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाया गया। नेता ने कहा कि खसरा केवल जमीन की मौजूदा स्थिति बताता है और उसके आधार पर मालिकाना हक पूरी तरह साबित नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी आधार पर जमीन को लेकर प्रशासनिक निष्कर्ष निकाला गया।
रात में कार्रवाई का आरोप
नेता ने आरोप लगाया कि रातों-रात पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया गया। उनका दावा है कि लोगों को घरों में रहने के लिए मजबूर किया गया और इसी दौरान मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि मौके पर पार्टी के नेता और एमएलसी भी मौजूद थे और पूरी रात इलाके में स्थिति पर नजर रखते रहे।
'हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे'
उन्होंने कहा कि इस मामले में कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जहां तक जरूरत होगी, वहां तक कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने कार्रवाई को संविधान और संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि यह केवल एक धार्मिक स्थल का मामला नहीं है।
'आज हमारे लिए, कल दूसरों के लिए'
बयान में उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक स्थल के गिराए जाने से किसी भी समुदाय के व्यक्ति को खुश नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे सहारनपुर के लोगों के लिए 'काला दिन' बताते हुए कहा कि अगर आज किसी एक समुदाय के धार्मिक स्थल के साथ ऐसा होता है तो भविष्य में यही कार्रवाई दूसरों के खिलाफ भी हो सकती है।