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Saharanpur: हत्या में बाप-बेटे समेत एक ही परिवार के छह लोगों को आजीवन कारावास, जानें क्या था पूरा मामला

Fri, 20 Jun 2025 08:47 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर

सार

court news: अमोली गांव में चार मई 2013 को धीर सिंह की हत्या की गई थी। इस मामले में सात गवाहों की गवाही अहम साबित हुई। कोर्ट ने बचाव पक्ष की सभी दलीलों को खारिज कर दिया। 
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कोर्ट। सांकेतिक तस्वीर।
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विस्तार
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रामपुर मनिहारान क्षेत्र के अमोली गांव के धीर सिंह हत्याकांड के मामले में 12 साल बाद बड़ा फैसला आया है। अदालत ने बाप-बेटे समेत एक ही परिवार के छह लोगों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसमें एक महिला भी शामिल है। दोषियों पर 1.62 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है।
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अमोली गांव के रहने वाले शिवलाल ने चार मई 2013 को रामपुर मनिहारान थाने में तहरीर दी थी। इसमें बताया था कि बच्चों के बीच आपस में मारपीट हो जाने के कारण परिवार की महिलाओं के बीच कहासुनी हो गई थी। इसी दौरान मांगा उर्फ मांगेराम ने अपने भाई राजेश, राजेंद्र, बेटे प्रदीप, प्रवीण और सविता पत्नी राजेश के साथ मिलकर घर में हमला कर दिया था। 
हमले में शिवलाल का भाई धीर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया था। जिला अस्पताल में उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया। यह मामला तभी से अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या तीन की अदालत में विचाराधीन था।
 

बचाव पक्ष की तरफ से अदालत में कई दलीलें दी गईं। तर्क दिया गया कि घटना का कोई उद्देश्य नहीं था। अभियुक्तों को धीर सिंह के मरने पर क्या लाभ होता, यह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में अभियुक्तों को दोषमुक्त किया जाए। इसके अलावा बचाव पक्ष की तरफ से कई पुराने केसों को भी आधार बनाते हुए उनका उदाहरण दिया गया। 
इस पूरे प्रकरण में सात गवाह थे, जिनकी गवाही अहम रही। अदालत ने साक्ष्य और गवाहों के आधार पर सभी छह दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा एक लाख 62 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया।
 
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अदालत ने नहीं माना विरल से विरलतम
आदेश में अदालत ने कहा कि विधि का सुस्थापित सिद्धांत है कि न्यायालय को केवल विरल से विरलतम मामलों में ही अभियुक्त को मृत्युदंड से दंडित करना चाहिए, लेकिन इस प्रकरण में छह अभियुक्तों ने अवैध समूह बनाकर उसके सामान्य उद्देश्य के अग्रसारण में धीर सिंह को चोट पहुंचायी, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। यह मामला माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा विरल से विरलतम मामलों के लिए दिए गए दिशा-निर्देशों के अंतर्गत नहीं आता। ऐसे में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है।

 
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