फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Deoband: जमीयत अध्यक्ष बोले, फासीवाद की चपेट में भारत, मदरसे किए जा रहे बंद, रची जा रहीं रोज नई-नई साजिशें

Sun, 13 Oct 2024 11:29 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर

सार

मौलाना अरशद ने कहा कि वक्फ संशोधन बिल की आड़ में वक्फ संपत्ति को हड़पने और हमें हमारी विरासत से वंचित करने की साजिश की जा रही है। 
विज्ञापन
मौलाना अरशद मदनी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि इस समय देश की जो स्थिति है, वह पूर्व में कभी नहीं थी। इन हालातों से साफ है कि भारत फासीवाद की चपेट में चला गया है।
विज्ञापन

रविवार को मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि नए-नए विवाद उत्पन्न कर मुसलमानों को भड़काने की कोशिश की जा रही है। उन्हें हाशिए पर धकेलने की योजनाबद्ध साजिशें की जा रहीं हैं। हर स्तर पर धार्मिक नफरत और कट्टरवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। सौहार्द और एकजुटता को नष्ट करने के लिए दिलों में नफरत के बीज बोए जा रहे हैं। मौलाना मदनी ने कहा कि मुसलमानों को निशाना बनाने के उद्देश्य से हर दिन नए कानून बनाए जा रहे हैं। न्याय को दबाया जा रहा है और संविधान की सर्वोच्चता को समाप्त कर शासन के बजाय तानाशाही रवैया अपनाकर लोगों में भय और आतंक फैलाया जा रहा है।
 

मौलाना अरशद ने कहा कि आज पूरी दुनिया में जिस आजादी और लोकतंत्र का डंका बजाया का रहा है, वह हमारे बुजुर्गों के लंबे संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। कहा कि वक्फ संशोधन बिल की आड़ में वक्फ संपत्ति को हड़पने और हमें हमारी अनमोल विरासत से वंचित करने की साजिश की जा रही है। इस साजिश का भी पर्दाफाश होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र पर लगातार हमले हो रहे हैं, मदरसों को बंद किया जा रहा है। धार्मिक स्वतंत्रता खत्म की जा रही है, खाने-पीने पर पाबंदियां लगाई जा रहीं हैं, यहां तक कि हमारे जीने का अधिकार भी छीना जा रहा है।
 
विज्ञापन

दिल्ली में करेंगे सम्मेलन
मौलाना मदनी ने बताया कि देश में मानवता के आधार पर समानता और करुणा की भावना को बढ़ावा देने, लोकतंत्र के उत्थान और संविधान के अस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए जमीयत आगामी तीन नवंबर को दिल्ली में सम्मेलन करेगी।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें