सहारनपुर के एसडी कन्या इंटर कालेज में निलंबित और कार्यवाहक प्रधानाचार्या के बीच कुर्सी की जंग को लेकर शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। दोनों ने प्रधानाचार्य के दफ्तर पर अपने-अपने ताले जड़ दिए हैं।
हंगामे के दौरान कालेज की छात्राएं भी प्रधानाचार्यों के बीच चले आरोप-प्रत्यारोप का तमाशा देखती रहीं। ऐसे माहौल से परेशान होने के बावजूद छात्राएं खुलकर तो सामने नहीं आ रही हैं। लेकिन उनका कहना है कि यह विवाद खत्म न हुआ तो उनका भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
बता दें कि एसडी कन्या इंटर कालेज में छात्राओं से गलत तरीके से फीस वसूली करने के आरोप में कालेज प्रबंधन ने विभागीय अफसराें के निर्देश पर सरिता शर्मा को प्रधानाचार्या पद से कॉलेज मैनजर ने विभागीय अधिकारियों के निर्देश पर सरिता शर्मा को प्रधानाचार्या पद से निलंबित कर दिया था।
उनके स्थान पर चंद्रा सिंह को कार्यवाहक प्रधानाचार्य बनाया था। तब से यह विवाद गरमाया हुआ है। चंद्रा सिंह का आरोप है कि मैनेजमेंट की ओर से 23 अप्रैल को सरिता शर्मा का निलंबन हुआ। इसके बाद सरिता शर्मा ने कार्यालय पर ताले जड़ दिए। तब से वह बाहर बैठकर काम निपटा रही हैं। उधर, सरिता शर्मा का आरोप है कि ताले चंद्रा द्वारा लगाए गए हैं।
मैंने कोई अवैध वसूली नहीं की: सरिता शर्मा
- निलंबित चल रही प्रधानाचार्य सरिता शर्मा ने खुद को निर्दोष बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने व्यवस्था के अनुरूप छात्राओं से निर्धारित मदों में शुल्क लिया है जो नियमानुसार शुल्क निधियों में जमा कराया जाता रहा है। बताया कि अनुसूचित जाति और सामान्य जाति की छात्राओं से अलग-अलग शुल्क का कोई प्रावधान नहीं है और उनके पास इस तरह का शासन का कोई आदेश भी नहीं है। ऐसे में वह पूरी तरह निर्दोष हैं।
डीआईओएस के पत्र ने उलझन में डाला
जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय का पत्र उलझन में डालने वाला है। एक तरफ डीडीआर की जांच में प्रधानाचार्य दोषी पाई जाती हैं, जिनके निर्देश पर जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय मुझे दोषी प्रधानाचार्य के विरुद्घ कार्रवाई करने के निर्देश देते हैं। अब 26 अप्रैल को एक और पत्र जिला विद्यालय निरीक्षक का मुझे मिला है, जिसमें उन्होंने अपने 18 अप्रैल के आदेश को स्थगित करने की बात कही गई है। यह पत्र उलझन में डालने वाला है।
-- सर्वेश्वरनाथ भास्कर, मैनेजर, एसडी कन्या इंटर कॉलेज।
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मैंने 26 अप्रैल को जो पत्र लिखा है उसमें दोषी प्रधानाचार्य की बहाली की कोई बात नहीं कही गई है। मैंने केवल अपने 18 अप्रैल के आदेश को स्थगित करने की बात कही है।
- रवि दत्त, जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय।
शिक्षा विभाग को भी नहीं छात्राओं के भविष्य की परवाह
सहारनपुर। छात्राओं से अवैध रूप से फीस वसूल करने में दोषी बताई गई प्रधानाचार्य को शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी बचाने में लगे हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय के निर्देश पर मैनेजमेंट ने प्रधानाचार्य को निलंबित किया था। मगर जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय ने अब नया पत्र जारी कर अपने पूर्व के आदेश को स्थगित करने के निर्देश मैनेजमेंट को दिए हैं। इसके चलते ही यह विवाद और गरमा गया है। विभाग को भी छात्राओं के भविष्य की परवाह नहीं है।
बताएं कि कॉलेज की प्रधानाचार्या रही सरिता शर्मा पर कक्षा नौ से 11वीं तक की दलित छात्राओं से गलत तरीके से फीस वसूली करने के आरोप लगे थे। भाजपा के अनुसूचित मोर्चा के महानगर अध्यक्ष दिलीप सोनकर ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय से की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग को मामले की जांच के आदेश दिए थे। जांच में शिकायत सही पाई गई। इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय रवि दत्त को प्रकरण में जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे।
जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय रवि दत्त ने कॉलेज मैनेजमेंट को 18 अप्रैल को पत्र लिखकर प्रधानाचार्य सरिता शर्मा के विरुद्घ उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 में प्राख्यापित नियमों/विनियमों के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। कॉलेज मैनेजर ने जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय के निर्देश पर 23 अप्रैल को सरिता शर्मा को निलंबित करते हुए चंद्रा सिंह को कार्यवाहक प्रधानाचार्य बनाया था। अब जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय ने 26 अप्रैल को एक और पत्र मैनेजमेंट को लिखा है। इसमें 18 अप्रैल को दिए गए आदेशों के क्रियान्वयन को अग्रिम आदेशों तक स्थगित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसे लेकर मैनेजमेंट उलझन में है। वह तय नहीं कर पा रहा है कि सरिता शर्मा को दुबारा बहाल किया जाए या नहीं। उधर, शिकायतकर्ता दिलीप सोनकर ने पूरे प्रकरण में विभागीय अधिकारियों पर प्रधानाचार्य के साथ मिले होने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को एक और शिकायती पत्र लिखा है।