सहारनपुर में ढमोला नदी की हालत देख प्रशासनिक अधिकारी भी ठिठक गए। समझ नहीं पाए कि कहां से अतिक्रमण हटाएं, कहां से सफाई कराएं? बोले, यहां तो नदी ही नजर नहीं आ रही है, सिर्फ एक नाला सा रह गया है, और यहां तो कॉलोनी बन गई है, सीसी रोड तक बन गई है।
नक्शे में तो ढमोला नदी अलग है। बुधवार को अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व हरीश चंद्र, सिंचाई विभाग के अधिकारियों, तहसीलदार, लेखपाल, कानूनगो एवं अन्य संबंधित अधिकारियों की टीम लेकर ढमोला नदी के निरीक्षण के लिए निकले।
सबसे पहले टीम गिल कॉलोनी पहुंची। यहां देखा तो नदी को पाट कर फैक्ट्री और तबेला बना हुआ मिला। अधिकारी भी हैरत में रह गए कि नदी का तट काफी पीछे रह गया और आधी से ज्यादा नदी पर निर्माण हो गया।
उन्होंने नक्शे से मिलान कराया तो लगभग सौ मीटर नदी में आगे तक कब्जा मिला। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों की टीम राकेश टॉकीज के पीछे स्थित ढमोला नदी की हालत देखने पहुंची तो वहां तो ढमोला नदी की बजाय कॉलोनी बसी मिली।
यहां तक कि वहां पर व्यवसाय भी चल रहा था। टीम को गलियों में से होकर नदी के किनारे तक पहुंचना पड़ा। वहां एक ओर पांव धोई नदी आ रही थी और दूसरी ओर से नगर निगम का नाला आकर ढमोला नदी में गिर रहा था।
नदी किनारे के अवशेष ढमोला नदी की शानदार सीढ़ियों और उसकी बनावट की दास्तां बताते हैं, जो अब मकानों में तब्दील हो चुके हैं, सीढ़ियां टूट चुकीं और बीच में एक धार्मिक स्थल बना दिया गया।
अधिकारी भी हैरत में रह गए कि नदी कहां गई, यहां तो सिर्फ नाला ही बह रहा है। उसके बाद अधिकारी जेल चुंगी के निकट कॉलोनी में पहुंचे और कॉलोनी के साथ एक बड़ा स्कूल ही नदी के बीच में बना दिया गया था यहां ऐसा लगा कि जैसे नदी हो ही ना।
अधिकारियों को समझ में नहीं आया कि करें तो क्या करें, कहां से शुरू करें और किससे शुरू करें, जिधर भी नजर दौड़ाई, नदी दबी हुई पाई। आखिर में टीम शहर में ढमोला नदी के प्रवेश स्थल पर देव कॉलोनी स्थित देवेंद्र नगर में पहुंची। वहां से ही ढमोला नदी का रुख मोड़ा गया मिला।
नक्शे के अनुसार नदी काफी चौड़ी है, लेकिन मौके पर पक्का निर्माण होने के चलते नदी का रुख ही मोड़ दिया गया। देवेंद्र नगर में दो सड़कें और कॉलोनी के प्लाट ही काट दिए गए। एडीएम ने बताया कि ढमोला नदी को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए पूरे प्लान और लोगों के सहयोग से अभियान चलाने की जरूरत है।