आपत्तियों के निस्तारण के बाद नगर निगम ने वार्डों पर आरक्षण तय कर दिया गया है। अभी तक शांत बैठे पार्षद का चुनाव लड़ने के इच्छुक लोग आरक्षण तय होते ही सक्रिय हो गए हैं, जो टिकट पाने के लिए नेताओं की शरण में हैं।
पिछले दिनों नगर निगम ने ओबीसी का रैपिड सर्वे कराया, जिसमें ओबीसी की संख्या करीब ढाई लाख आई। एससी और एसटी की संख्या 14 से 15 प्रतिशत है। नगर निगम की कुल आबादी आठ लाख पांच हजार 478 है।
ओबीसी के सर्वे के बाद नगर निगम ने लोगों से आपत्ति मांगी थीं। तीन और चार मई को निगम के पास कुल 15 आपत्तियां आईं, जिनका निस्तारण शनिवार को कर दिया गया। साथ ही आरक्षण भी तय हो गया है। सूत्रों के अनुसार कुल 70 वार्डों में से एससी और एसटी के खाते में दस वार्ड आए हैं। ओबीसी के लिए 19 वार्ड आरक्षित किए गए हैं।
बाकी 41 वार्ड सामान्य रहेंगे। एससी-एसटी, ओबीसी और सामान्य सभी सीटों पर 33 प्रतिशत महिलाओं का हक रहेगा। यानी एससी की सीटों पर तीन, ओबीसी की सीटों पर छह और सामान्य की सीटों पर करीब 13 महिलाएं पार्षद का चुनाव लडे़ंगी। उधर, आरक्षण तय होते ही पार्षद चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले लोग सक्रिय हो गए हैं। वह टिकट पाने के लिए नेताओं के चक्कर लगा रहे हैं। उधर, नगरायुक्त ने भी आरक्षण तय कर दिए जाने की पुष्टि की है।