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डाल रहे सीवर लाइन, निस्तारण की तैयारी नहीं

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सहारनपुर। करीब डेढ़ साल से शहर में सीवर लाइन डालने का काम चल रहा है। नई सीवर लाइन की लंबाई 169 किलोमीटर है, जिस पर 167 करोड़ रुपये का खर्च आना है। खास बात यह है कि सीवर लाइनें तो डाली जा रही हैं, लेकिन उक्त लाइनों से गुजरने वाले सीवरेज के निस्तारण को लेकर काम लटका हुआ है।
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अमृत योजना के तहत दिल्ली रोड की मिशन कंपाउंड, चंद्रनगर, आवास विकास, हकीकतनगर समेत कई कॉलोनियों में सीवर लाइन डाली जा रही है। योजना के तहत कुल 59 किलोमीटर की लाइन डाली जानी है, जिसका बजट 82 करोड़ रुपये का है। उधर, स्मार्ट सिटी योजना के तहत चिह्नित किए गए एबीडी (एरिया बेस्ड डेवलेपमेंट) क्षेत्र में स्मार्ट सिटी के तहत करीब 100 किलोमीटर की सीवर लाइन डाली जानी है, जिसका बजट करीब 85 करोड़ रुपये का है। एबीडी क्षेत्र में नगर निगम के 21 वार्डों की कई कॉलोनियां शामिल हैं। जिनसे भारी मात्रा में सीवरेज निकलता है। शहर में पहले से संचालित केवल 28 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) का एसटीपी है, जो पर्याप्त नहीं है। ऐसे में एक 90 एमएलडी का एसटीपी स्वीकृत है, जिसको लेकर तैयारी नजर नहीं आ रही है।
तीन साल से लटका है एसटीपी
नमामि गंगे योजना के तहत शहर में 90 एमएलडी का एसटीपी स्वीकृत है। इसके लिए 6.5 हेक्टेयर यानी करीब 100 बीघा भूमि चाहिए। जल निगम को जमीन नगर निगम खरीदकर देगा। पहले मल्हीपुर रोड स्थित बादशाहपुर (रामनगर) के पास जमीन फाइनल हो जाने की बात कही जा रही थी, लेकिन अब शेखपुरा क्षेत्र में कांशीराम कॉलोनी के पास जमीन देखने की बात कही जा रही है। उक्त एसटीपी में ही शहरभर का सीवरेज आएगा, जिसको ट्रीट कर ढमोला नदी में छोड़ा जाएगा। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि एसटीपी के डीपीआर पर आपत्ति लगी हुई है। सीवर नदी में सीधे डालने पर एनजीटी की मनाही है।
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दो हिस्सों में बंटेगा सीवरेज
जल निगम के अधिकारियों का कहना है कि रेलवे लाइन से कचहरी साइड की कॉलोनियों का सीवरेज मल्हीपुर रोड स्थित 28 एमएलडी के एसटीपी में भेजा जाएगा, जबकि लाइन से दूसरी साइड के शहर का सीवरेज कांशीराम कॉलोनी के पास बनने वाले एसटीपी में छोड़ा जाएगा।
----- वर्जन
सीवर लाइन डालने का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। मार्च 2022 तक इसे पूर्ण कर लेंगे। रही बात 90 एमएलडी के एसटीपी की तो उसका डीपीआर नमामि गंगे में गया हुआ है, जो अभी तक स्वीकृत नहीं हुआ है। जैसे ही डीपीआर को स्वीकृति मिल जाएगी तो आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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-- पवन कुमार अग्रवाल, अधिशासी अभियंता, जल निगम।
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