अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के रडार पर ऐसे 250 खाते आ गए हैं। इनके जरिए मदरसे के नाम पर 58 लाख रुपये की छात्रवृत्ति हड़पी गई। यह खाते किस-किस के नाम पर खुले हैं और किसने खुलवाए थे और गारंटर कौन था। इस दिशा में विभाग ने गहनता से पड़ताल शुरू कर दी है। इस प्रकरण में कई विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों की गर्दन भी फंसी नजर आ रही है।
बेहट क्षेत्र के बादशाही बाग में फर्जी तरीके से कादरिया उल उलमा एंग्लो मदरसा संचालित होना दर्शाकर 58 लाख रुपये हड़प लिए गए। मंडलायुक्त के निर्देश पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण शरद कुमार श्रीवास्तव की जांच में यह खुलासा हुआ तो हड़कंप मच गया, जबकि यह मदरसा 2012 में बंद कर दिया गया था।
इसका शपथ पत्र भी मदरसा संचालक दे चुका है। लेकिन कागजों में मदरसा संचालित किया गया और सरकार से प्राप्त होने वाले धनराशि की बंदरबांट होती रही। दोबारा हुई जांच के दौरान जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मौके पर गए तो वहां कोई मदरसा नहीं था। जांच के बाद रिपोर्ट शासन को भेज दी गई।
अब जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने उन 250 खातों को खंगालना शुरू कर दिया है। इनमें छात्रवृत्ति गई और पैसा निकाल लिया गया। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शरद कुमार श्रीवास्वत ने बताया कि किस-किस के नाम पर यह खाते हैं और कौन इन्हें संचालित कर रहा है। इनमें ज्यादातर खाते मोरगंज बाजार स्थित एसबीआई के हैं। बैंक से विभाग ने खाताधारकों की लिस्ट और उनका पूरा ब्यौरा मांगा है। इन खाता धारकों का जमानती कौन थे, इसको दिशा में भी जांच तेज कर दी गई है।
कई कर्मचारी और अधिकारी जा सकते हैं जेल
सहारनपुर। वर्ष 2016 और 2017 में छात्रवृत्ति के 58 लाख रुपये हड़प गए हैं। इससे पूर्व नवंबर 2018 मदरसे की जांच की गई थी। इसमें मदरसा होना दर्शाया गया था। यही रिपोर्ट तत्कालीन जांच अधिकारी ने उच्चाधिकारियों को दी थी। इस प्रकरण में विभाग के तत्कालीन कई कर्मचारियों और दो अधिकारी शक के दायरे में आ गए हैं। मामले को लेकर शासन गंभीर है। इसलिए बारीकी से जांच की जा रही है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने बताया कि मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ शासन के निर्देशानुसार रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। इस मामले में विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आ रही है। उधर, सूत्र बताते हैं कि पूर्व के दो अधिकारी भी शक के दायरे में है। इनके अलावा कर्मचारी हैं और चार लोग वो हैं जो मदरसा संचालित कर रहे थे। विभाग इनके नाम अभी सार्वजनिक नहीं कर रहा है।