गरीबों की उज्ज्वला लावारिस हो गई है। जिले के किसी भी सरकारी विभाग के पास उज्ज्वला योजना का न कोई रिकार्ड है और न ही कोई जानकारी है। पूर्ति विभाग ने भी इस बारे में किसी प्रकार की जानकारी होने से इंकार किया है। गैस कंपनियों के प्रतिनिधियों पर ही इस योजना को छोड़ दिया गया है।
भारत सरकार द्वारा गरीबों के घर में भी गैस का चूल्हा जलवाने के लिए उज्ज्वला योजना चलाई जा रही है। जिसके लिए जिले से भी हजारों लोगों ने सब्सिडी छोड़ दी है। लेकिन इस योजना की मानीटरिंग करने वाला जिले में कोई विभाग नहीं है।
उज्ज्वला योजना के तहत किसको लाभ दिया जा रहा है, पात्र है अथवा नहीं, इससे किसी को कोई लेनादेना नहीं है। लगातार शिकायतें आ रही हैं, लेकिन कोई सुनवाई के लिए जिम्मेदारी ही लेने को तैयार नहीं है। यहां तक कि पूर्ति विभाग के पास भी इससे संबंधित कोई जानकारी नहीं है।
किसको कनेक्शन दिए जा रहे हैं और वह पात्र है भी अथवा नहीं। इसकी जवाबदेही भी किसी अधिकारी की यहां नहीं रह गई है। गैस कंपनियों ने ही अपने हिसाब से अपने लोगों को इसके लिए छोड़ रखा है। गैस एजेंसियां अपनी ही ओर से कनेक्शन जारी कर रहीं हैं। कनेक्शन लोगों के पास पहुंच रहा है अथवा नहीं, किसी को कुछ नहीं पता।
पूर्ति विभाग के नियंत्रण से बाहर ः जिला पूर्ति अधिकारी ध्रुवराज सिंह यादव का कहना है कि गैस एजेंसियों को ही उज्ज्वला योजना के तहत कनेक्शन वितरण के अधिकार दिए गए हैं। उनके पास इसका कोई आंकड़ा नहीं है। यह उनके नियंत्रण से बाहर है।
केंद्र सरकार से ही आ रही है पात्रों की सूची ः गौरव गैस एजेंसी के संचालक विनोद कुमार तेजियान का कहना है कि भारत सरकार से ही उज्ज्वला योजना के तहत कनेक्शन देने के लिए सूची भेजी जा रही है। चाहे उसमें अमीर हों या गरीब हों। उन्हें इससे कोई लेना देना नहीं है। वह तो सिर्फ इतना देखते हैं कि जिसका सूची में नाम है, उसके पास पहले से तो कोई गैस कनेक्शन नहीं है। सिर्फ महिला के नाम से ही कनेेक्शन दिया जा रहा है। गैस कंपनी के अधिकारी ही मानीटरिंग कर रहे हैं।
सांसद की देखरेख में बंटेंगे कनेक्शन
उज्ज्वला योजना के तहत अब गैस कनेक्शनों का वितरण सांसद की देखरेख में किया जाएगा। अभी तक गैस एजेंसियों द्वारा स्वयं ही गैस कनेेक्शन दिए जा रहे थे। जिस कारण लोगों द्वारा लगातार शिकायतें की जा रही थी। नए जारी आदेशों के अनुसार सांसद अथवा सांसद प्रतिनिधि कनेक्शन वितरण पर नजर रखेंगे।