सहारनपुर। शहर की हवा में कितना प्रदूषण है? प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को मालूम नहीं है। यह स्थिति तब है, जबकि इन दिनों दिल्ली एनसीआर के साथ पश्चिमी यूपी के भी कई शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब या कहें खतरनाक स्तर पर है। दिवाली के बाद से सहारनपुर की हवा में भी प्रदूषण का जहर साफ देखा जा रहा है। मगर मंडल मुख्यालय और स्मार्ट सिटी होने के बावजूद सहारनपुर में वायु प्रदूषण मापने की व्यवस्था नहीं है।
दिवाली पर आतिशबाजी की वजह से पीएम-10 की मात्रा घंटाघर पर 426.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर, इंस्टीट्यूट ऑफ पेपर टेक्लोलॉजी पर 382.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही थी। दिवाली के बाद से हवा में लगातार धुुआं बना हुआ है, जिसकी वजह से दिल, सांस और दमा रोगियों को परेशानी हो रही है। कई लोगों ने आंखों में जलन की भी शिकायत की है। दिल्ली एनसीआर में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर है, जिसकी वजह से आपातकाल की स्थिति बनी हुई है। मेरठ में भी तीन दिन पहले स्थिति खराब थी। इन सबकी वजह उक्त शहरों की हवा की गुणवत्ता का प्रतिदिन जांच होना है, जिससे प्रतिदिन हवा के स्तर का पता चलता रहता है, मगर सहारनपुर के मंडल मुख्यालय होने और स्मार्ट सिटी होने के बावजूद यहां प्रतिदिन हवा की गुणवत्ता मापने की व्यवस्था नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय है, जहां केवल कागजी कार्रवाई होती है। प्रैक्टिकल के नाम पर साल में एक बार दिवाली पर शहर में तीन से चार जगह उपकरण लगाए जाते हैं, जिनसे आतिशबाजी के बाद हवा की गुणवत्ता की जांच की जाती है। अधिकारियों का कहना है कि सहारनपुर में वायु प्रदूषण मापने की जिम्मेदारी रुड़की आईआईटी पर है, जो सप्ताह में एक बार जांच कर रिपोर्ट सौंपती है।
वाहनों की नहीं होती जांच
वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या और उनसे निकलने वाला धुआं भी वायु प्रदूषण की बड़ी वजह है। सहारनपुर शहर की सड़कों पर खटारा वाहनों को धुआं उगलते देखा जा सकता है। कभी भी धुआं उगलते वाहनों को रोककर कार्रवाई नहीं की जाती है।
फैक्ट्रियां भी उगल रहीं धुआं
शहर में बड़ी संख्या में ऐसी फैक्ट्रियां हैं, जो जहरीला धुआं हवा में घोल रही हैं। बेहट रोड पर पुराने टायरों से तेल निकालने का काम होता है। इसके लिए टायरों को जलाया जाता है, जिनसे निकलने वाला धुआं आसपास के लोगों को बीमार बना रहा है। इनके अलावा शहर से सटी अनेक बड़ी इंडस्ट्री भी प्रदूषण फैला रही हैं। इतना ही नहीं, बड़ी संख्या में ईंट भट्टे भी हैं, जहां ईंटों को पकाने के लिए पुराने टायर जलाए जाते हैं।
सहारनपुर में वायु की गुणवत्ता को प्रतिदिन मापने की व्यवस्था नहीं है। यहां आईआईटी रुड़की को जिम्मा दिया गया है, जो सप्ताह में एक बार वायु प्रदूषण की जांच करते हैं। सप्ताह ही में रिपोर्ट हमारे पास आती है।
एसआर मौर्या, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
वायु प्रदूषण को लेकर संभागीय परिवहन विभाग गंभीर है। हमारी टीमें लगातार जगह-जगह वाहनों की चेकिंग करती हैं। चेकिंग के दौरान वाहनों की तमाम तरह की जांच की जाती है, जिसमें प्रदूषण भी शामिल है। हर माह बड़ी संख्या में प्रदूषण को लेकर भी चालान काटे जाते हैं।
राधेश्याम, आरटीओ।