सहारनपुर। बरसात शुरू होने के बाद जनपद में गन्ने की फसल पर पोक्का बोईंग रोग का प्रकोप दिखाई देने लगा है। फफूंद जनित यह रोग गन्ने की चोटी को प्रभावित करता है। जिससे पौधे की बढ़वार प्रभावित होती है। बरसात के बाद नमी के वातावरण में यह रोग तेजी से फैलता है। जिससे फसल की उत्पादकता प्रभावित होती है। गन्ने की सीओ 0238 प्रजाति पर इसका प्रकोप अधिक है।
जनपद में गन्ने की फसल पर पोक्का बोईंग रोग का प्रकोप शुरू हो गया है। इस रोग से ग्रसित फसल में तीन तरह के लक्षण दिखाई देते हैं। शुरू की अवस्था में प्रभावित पौधे की नई पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। फिर प्रभावित पौधे की पत्तियां घूमकर रस्सी जैसी दिखाई देती हैं। गोभ की पत्तियां अन्य पत्तियों की तरह छोटी रह जाती हैं। प्रकोप के अधिक बढ़ने पर शीर्ष भाग में पीलापन, लालपन और चाकू जैसा कट दिखाई देता है। इस रोग के रोगाणु हवा के द्वारा फसल में तेजी से फैलते हैं। 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान और वातावरण में 70 से 80 प्रतिशत नमी इस रोग के लिए अधिक अनुकूल होती है। समय पर उपचार नहीं किया गया तो प्रभावित फसल की उत्पादकता पर बेहद विपरीत असर पड़ता है।
ऐसे करें नियंत्रण
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि इस रोग पर नियंत्रण पाने के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड की एक किलोग्राम मात्रा को 300 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। इसके अलावा टेबूकोनाजॉल की 250 मिलीलीटर मात्रा को 300 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करना फायदेमंद रहता है। कार्बेंन्डाजिम एवं मैंकोजेब की एक किलोग्राम मात्रा को 300 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना लाभकारी है।