वार्षिक गजरथ महोत्सव यात्रा के उपलक्ष्य में आयोजित हो रहे सांस्कृतिक, धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें देश भर से जाने-माने कवियों ने अपनी रचनाओं से जहां दर्शकों को खूब गुदगुदाया, वहीं सामाजिक कुरीतियों के अलावा ज्लवंत प्रश्न आतंकवाद पर भी जमकर कटाक्ष किए।
जैन बाग वीर नगर में आयोजित विराट कवि सम्मेलन का उद्घाटन कमल जैन, चित्रानवरण महेश चंद सर्राफ, दीप प्रज्ज्वलन नवीन जैन, जैन समाज के अध्यक्ष राजेश कुमार जैन, मुख्य अतिथि आदीश जैन, सरफराज खान, समारोह अध्यक्ष संदीप जैन ने किया। जिनवाणी पाठ से कविता तिवारी ने किया।
छतीसगढ़ से पधारे जाने मान हास्य व्यंग्य के कवि पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि धन्य है छत्तीसगढ़ की धरा जो प्रभु महावीर स्वामी के सिद्धांतों और दर्शनों का अनु ग्रहण किये हुए हैं। उन्होंने अपनी हास्य कविताओं से जहां सभी को खूब हंसकर लोटपोट होने के मजबूर कर दिया। वहीं, व्यंग्य के माध्यम से जमकर कटाक्ष किया।
हास्य व्यंग्य करते हुए सुरेंद्र दुबे ने कहा कि मोदी जी कहते है ना खाऊंगा ना खाने दूंगा हम सोचते हैं कि फिर इतने शौचालय बनवाते हो क्यों, राहुल गांधी की बैंकाक यात्रा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि बैंकाक में सब कुछ हो सकता है परंतु चिन्नत नहीं...। अलवर से आए कवि विनित, सुप्रसिद्ध गीतकार राजेंद्र ने आज टूटते संयुक्त परिवार के दर्द की हकीकत कुछ यू अपने शब्दों में बयां की।
कहा कि हकीकत देख दुनिया के मुंह पर पढ़ गया ताला, बहुत खामोश बैठा है बहुत कुछ बोलने वाला, पिता को मैं निभा लूंगा तू मां को साथ रख ले विधाता जो ना कर पाया वो बेटों ने कर डाला.. की प्रस्तुति से सभी की वाहवाही लूटी।
भोपाल से आयी डॉ. अनु सपन ने वर्तमान समय में लगातार बढ़ती महंगाई पर बच्चों की ख्वाहिश और उस पर पिता की बेचारगी को बडे़ ही सुंदर ढंग से मानवीय पंक्तियों में प्रस्तुत किया। कहा आया खिलौने वाला लाचार बाप रोया, अंगुली छुड़ा रहे थे बच्चे मचल मचल के.. सुनाया तो सभी की आंखें नम हो गई।
कवि प्रख्यात मिश्रा ने नारी की अस्मिता से हो रही खिलवाड़ की घटनाओं पर कहा कि नन्ही सी चिड़िया बाज के पंजों में देखकर सपने में मुझको रात भर बिटियां दिखाई दी। कवि सुनील जोगी ने जैनत्व धर्म के दर्शन को आज की प्रासंगिकता बताते हुए कहा कि प्रभु महावीर ना होते तो आज अंहिसा का महत्त्व बताता कौन, प्रभु महावीर ना होते तो जीओ और जीने दो का संदेश देता कौन, प्रभु महावीर ना होते तो मानवता बढ़ाता कौन, नन्हे से नन्हे प्राणी को जीवन दान दिलाता कौन। कवि सुदीप भोला ने भी अपनी कविताओं से भावविभोर किया। संचालन कवि विनित चौहान ने किया।